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पुण्यतिथि पर पटना में सरकार लगायेगी पं. दीनदयाल की मूर्ति- उपमुख्यमंत्री

पुण्यतिथि पर पटना में सरकार लगायेगी पं. दीनदयाल की मूर्ति- उपमुख्यमंत्री



पुण्यतिथि पर पटना में सरकार लगायेगी पं. दीनदयाल की मूर्ति- उपमुख्यमंत्री

पटना 25.09.2019

प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती’ समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 11 फरवरी को पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर राज्य सरकार पटना में उनकी मूर्ति लगायेगी। अगले कुछ महीनों में स्व.अटल बिहारी वाजपेयी और अरुण जेटली की प्रतिमा भी लगायी जायेगी।


श्री मोदी ने कहा कि भाजपा के लिए अनुच्छेद 370 को खत्म करना व ‘कश्मीर हमारा है’ का नारा कोई आज का नहीं बल्कि जनसंघ के स्थापना काल से रहा है। अब नया नारा है कि ‘ हर कश्मीरी को गले लगाना है, कश्मीर को स्वर्ग बनाना है।’ कश्मीर में आंदोलन के दौरान ही जनसंघ के प्रथम संस्थापक अध्यक्ष डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वहां अपना बलिदान दिया था। पं. उपाध्याय का भी मानना था कि पं. नेहरू की गलतियों के कारण कश्मीर का पूर्ण वैधानिक विलय भारत में नहीं हो सका था। जनसंघ ने तो 1952 में कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय का प्रस्ताव पारित कर 29 जून, 1952 को पूरे देश में ‘कश्मीर दिवस’ मनाया था।


उन्हांेने कहा कि 1967 में बिहार सहित देश के 9 राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार के गठन में डा. राममनोहर लोहिया और पं. दीनदयाल उपाध्याय की बड़ी भूमिका थी। तब यह भी स्थापित हुआ कि कांग्रेस का मुकाबला केवल जनसंघ ही कर सकती है। जनसंघ और भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया है। 1965 के युद्ध के बाद ताशकंद समझौते के तहत भारत द्वारा जीते हुए भूक्षेत्र पाकिस्तान को सौंपने पर पं. उपाध्याय ने कहा था कि अगर शास्त्री जी जिंदा लौट कर भारत आते तो उनका स्वागत जनसंघ काले झंडे से करता।



पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय जनसंघ को उस दौर में आगे बढ़ाया जब साम्यवाद व समाजवाद का काफी जोर था। साम्यवादियों का नारा ‘ कमाने वाला खायेगा’ की जगह ‘ उन्होंने ‘कमाने वाला खिलायेगा, जो जन्मा हैं वह खायेगा’ का विचार देकर अर्थनीति को नए सिरे से परिभाषित किया। पश्चिम का विचार ही श्रेष्ठ है के विपरीत पं. उपाध्याय ने बीच का रास्ता अपनाते हुए कहा कि‘ जो हमारा है उसे युगानुकूल और जो बाहर का है उसे देशानुकूल बनायेंगे।’ आज अगर भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो उसके पीछे डा. मुखर्जी, डा. रघुवीर के साथ पं. दीनदयाल उपाध्याय का बहुत बड़ा योगदान हैं।

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