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जब समाज में नारियों के खिलाफ हिसात्मक कुकर्म होते हुए सुना :-अंकुर कुमार

जब समाज में नारियों के खिलाफ हिसात्मक कुकर्म होते हुए सुना :-अंकुर कुमार



 जब समाज में नारियों के खिलाफ हिसात्मक कुकर्म होते हुए सुना :-अंकुर कुमार

मै अंकुर कुमार आप सबो के साथ इस रोमांच भरे अनुभव को बाटने जा रहा हूं। उम्र की बंदिशे, चिंताओं,
बाधाओ, और जंजीर को तोड़कर उन पर नियंत्रण करके यहां तक पहुंचा। पारिवारिक , शिक्षक एवम् कुछ मित्रों के समर्थन और अटूट विश्वास ने मुझे प्रोत्साहित किया। मेरा जन्म बिहार के रोहतास जिला में हुआ और पढ़ाई झारखण्ड के हजारीबाग जिला से हुई। अभी पटना यूनिवर्सिटी (दरभंगा हाउस) से (इंग्लिश) पीजी फर्स्ट सेमेस्टर में हूं।


जब समाज में नारियों के खिलाफ इतने हिंसात्मक कुकर्म होते सुना तो मेरी रूह थरथरा के रह गई। इस विषय में मैंने अपनी विचारधारा को लोगो तक पहुंचाने की ठान ली। अपने लेखनी की द्वारा
लोगो के मनोभाव को मानवता के मार्ग की ओर आकृष्ट करना चाहा। मैंने सामाजिक जागरूकता पैदा करने के लिए हजारों लोगो से , प्रकाशन हाउस वालो से बात की, कई बार उनसे मिला बस यू समझ लीजिए जंग में अकेला था मै।
मंजिल तो बिल्कुल स्पष्ट थी पर मार्ग अनजाने थे।
अनेक लोग अनेकों विचारधारा किसी ने प्रोत्साहित किया तो किसी ने उत्साह भंग करनी चाही। मै अडिग रहा क्युकी मुझे अपनी माओ, बहनों , बेटियों तथा सभी स्त्रियों के हित में लड़ना जो था।
22 साल की उम्र में मेरी पहली उपन्यास "हेल्पलेस सोल" दिसम्बर 2017 मे प्रकाशित हुई। जब यह पुस्तक लोगों के बीच आई तो मुझे अनपेक्षित सर्मथन मिला। पाठकों ने मेरी लेखनी कला की भरपूर तारीफ की और मुझे इस क्षेत्र में आने की सलाह दी। आनलाईन मार्केटिंग एप जैसे अमेजन,फ्लीपकार्ट, किंडल इत्यादि पर लोगों ने समीक्षा की और मेरा हौसला बुलंद किया। 2018 में हेल्पलेस सोल को ऑनलाइन 'बेस्ट सेलर' का खिताब मिलने के बाद मेरी खुशी चरम शिखरों को चूम रही थी।
ऐसा कहा जाए की अब तक मैं अकेला था लेकिन हेल्पलेस सोल की सफलता के बाद मझे हज़ारो लोगों से प्ररणा तथा प्रोत्साहन मिली। उनकी ही माँग पर मैनें 2018 में अपनी दूसरी नोवेल "स्टीलर कांस्पीरेसी" को प्रस्तुत किया। फिर वही प्यार,सर्मथन और दुआओ के साथ लोगों ने स्वागत किया।निरंतर एक्रागचित हो कर मैंने ये सब हासिल किया।


ठीक उसी जज्बे के साथ मेरी तीसरी नोवेल "अननोन शैडो" मर्केट में आने वाली है और मुझे पूरा विश्र्वास है कि लोग मेरी इस नोवेल को भी उतना ही नहीं बल्कि उससे ज्यादा पसंद करेंगे।

 अतः मैनें लोगो की बिहारियों के प्रति जो मलीन धारणा है उसपे तमाचा मारा है। जिस हीन भावना से लोग बिहारीयों का तिरस्कार करते हैं वास्तिवक में दुखनीय तथा सोचनीय है।आज मेरी नोवेल ने राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय (मलेशिया, सिंगापुर) लेवल पर अपनी जगह बना चूकी है। कुछ भी नामुमकिन नही है।आप अगर किसी सपने को देखते हैं तो उसे पूरा करने के लिए अपनी जान को दाव पर लगा दिजिए यकिन मानिए आपकी मंजिल आपको जरूर मिलेगी और जिस भी दिन मंजिल मिलेगी आप सूखद अत्यंत आन्नदित महसूस करेंगे।
    आशा करता हूँ कि आप सभी लोग इसी तरह से मुझे अपने प्यार के रंगो में रंगते रहेंगे ताकि मैं हमारे देश का नाम पूरे विश्व में रौशन कर पाऊ।
मैं अंकुर कुमार,आप सभी के मेरे प्रति प्यार और सम्मान के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।




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