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2 लाख ब्राहम्ण होंगे ब्राहम्ण महाकंभ के संयोजक - उरवार

2 लाख ब्राहम्ण होंगे ब्राहम्ण महाकंभ के संयोजक - उरवार


2 लाख ब्राहम्ण होंगे ब्राहम्ण महाकंभ के संयोजक - उरवार

आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य की नगरी पाटलिपुत्र में आईएमए हॉल,गाँधी मैदान पटना में चाणक्य विकास मोर्चा ने 12 अप्रैल 2020 को आयोजित होने वाला "ब्राह्मण महाकुंभ" को तैयारी को लेकर एक चिंतन एवं कार्यक्रम विस्तार का आयोजन किया। बिहार ही नहीं कई अन्य राज्य के लोग भी संयोजक बनने एवं महाकुम्भ का हिस्सा बनने के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हए ब्रजेश उरवार ने कहा कि 1947 में मिली आजादी से लेकर 2019 तक आखिर किस आधार पर पापी, गद्दार, राष्ट्रद्रोही. लोभी,दुष्ट, बेईमान एवं जातिवाद करने का आरोप हम ब्राहम्णों पर लगातार लगाया जा रहा है लेकिन एक भी ब्राहम्ण का नाम नहीं बताया जाता। ब्राहम्णों का गौरवशाली अतित असुरों को नाश करने वाले भगवान परशुराम, रामायाण महाग्रंथ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास, धर्म- धनुष एवं बौद्धिक ज्ञान के प्रणेता आचार्य द्रोणाचार्य,राजनीति एवं अर्थशास्त्र के महापंडित आचार्य विष्णुगप्त चाणक्य, विश्व को शून्य के जन्मदाता गणितज्ञ भूगोलशास्त्री आर्यभट्ट,सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रणेता मंडन मिश्र,रामकृष्ण परमहंस, महारानी लक्ष्मीबाई, बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले,रविन्द्र नाथ टागौर, राजाराम मोहन राय, मदन मोहन मालवीय, मैथिली भक्ति एवं श्रृंगाररस के महाकवि महापंडित विद्यापति,मंगल पाण्डेय, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आजाद, मेजर सोमनाथ शर्मा, देवेन मिश्र, दीन दयाल उपाध्याय ,दुनिया में खास पहचान रखने वाले साहित्यकार जानकी वल्लभ शास्त्री. राजनीति में गिरते अस्थिरता को नया आयाम देने वालेमहापंडित अटल बिहार बाजपेयी, राष्ट्र एवं सामाजिक विचारक भाई राजीव दीक्षित एवं वर्तमान समय में हिन्दुओं के लिए कुर्बान होने वाले भाई कमलेश तिवारी जैसे हजारों-हजार ब्राहम्ण का योगदान को भूलाकर न जाने किस ब्राह्मण के कारण लोग ब्राह्मणजाति पर गंदी राजनीति का आरोप एवं मनगढंत आरोप लगाकर ब्राहम्णों का वर्तमान भयानक एवं दर्दनाक बनाकर उनका भविष्य बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आजादी के बाद युवा ब्राह्मणों के पास यह गंभीर समस्या आन पड़ी है कि वह उस गलती का दंड भुगत रहा है जिसको उसने कभी किया ही नहीं। एससी-एसटी एक्ट से ब्राहम्णों के साथ पढ़े लिखे स्वर्ण एवं पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग को घोड़े की नाल की तरह नकेल कसकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का राजनीति प्रारंभ हो चुका है। उरवार ने यह भी कहा कि हम ब्राह्मणों को पहले मुगल शासकों ने हमें वेदशाला से दूर कर दिया, इसके बाद अंग्रेजों ने मंदिरों एवं धर्म पर पर प्रहार कर धर्म एवं अध्यात्तम के साथ गौरवशाली इतिहास को ध्वस्त कर दिया। 1947 के बाद आजादी के बाद सरकार में कुर्सी पर काबिज रहने के लिए धीरे-धीरे संस्कृत को समाप्त कर दिया जिसकी वजह से ब्राह्मण वर्गआरक्षण की मार की वजह से सरकारी नौकरी से भी चले गये और संस्कृत के ज्ञान के अभाव में पूजा-पाठ एवं कर्मकांड से भी बाहर होते जा रहे हैं। सनातन धर्म को कुचलने के लिए कई धर्म भी बने पर ब्राह्मणों ने सभी झंझावतों को झेलते हुए हिन्दओं की रक्षार्थ मंदिरों में गाली सुनकर भी भगवान के अराधना से विमुक्त नहीं हुए। हमारे गौरवशाली अतित कोवामपंथी लेखकों, कुछ उपन्यासकार एवं कहानीकार ने ब्राह्मणों को विलेन के रूप में प्रस्तुत कर समाज से बहिष्कृत करने का षडयंत्र रचा है। हमारे महापुरूषों के बलिदान को सही ढंग से चित्रण किया जाता तो यह बात सामने आती की संविधान के रचयिता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को भी ब्राह्मण परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने में अहम भूमिका निभायाथा लेकिन उसकी चर्चा कभी कोई नहीं करता। ब्राह्मण एवं दलितों को लडवाने का राजनीति किया जा रहा है जबकि रामायण में गोस्वामी तुलसीदास जी ने सबरी का जुठा बैर का वर्णन करके उंच-नीच, अमीर-गरीब की खाई का पाटा है। आज आजाद भारत में सच एवं सत्यवादी आरोप लगाने का आरोप कुछ खास जातियों को ही है और ब्राह्मण,सवर्ण, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग सिर्फ झुठ बोलते हैं क्योंकि कानून ने कहा है कि विशेष जाति ही सिर्फ सच बोलती है जिसकी वजह से पुलिस भी खुद को कमजोर समझती है। गौरवशाली अतित को गलत तरीके से समाज में रखकर ब्राहम्ण का वर्तमान को दर्दनाक, खतरनाक एवं असहनीय बना दिया गया है लेकिन चाणक्य के युवा वंशज अपने अतितको अपनी युवा पीढ़ी के बीच ले जाने का बौद्धिक कार्यक्रम हो रहा है। साहित्य दर्शन के साथ राजनीतिक हस्तक्षेप करने के लिए 12 अप्रैल 2020 को ब्राहम्ण महाकुंभ का आयोजन आयोजित है। कार्यक्रम में ब्राम्हणों का गांधी मैदान में आमंत्रित करने के लिए देशभर में 02 लाख संयोजक बनाने का कार्य जिला एवं देश के अन्य प्रदेशों में प्रारंभ कर दिया गया है। प्रवक्ता, राष्ट्रीय, राज्य, जिला, प्रखण्ड, पंचायत, राजस्व ग्राम संयोजक सहित अधिवक्ता प्रकोष्ठ, महिला प्रकोष्ठ,युवा प्रकोष्ठ, प्रतियोगी छात्र प्रकोष्ठ, चिकित्सा प्रकोष्ठ, शिक्षा प्रकोष्ठ, मीडिया प्रकोष्ठ, अभियंता प्रकोष्ठ, श्रमिक प्रकोष्ठ,कर्मकांड प्रकोष्ठ, मंदिर प्रकोष्ठ की भी जिम्मेवारी सौंपी गयी है। 15 सूत्री मांग को लेकर ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इस महाकुंभ में राजनीति, प्रशासनिक, पुलिस, न्यायपालिका, साहित्यकार, पत्रकारिता, कलाकार,संगीतकार, नाट्यकर्मी सहित विभिन्न क्षेत्र के प्रबुद्ध ब्राहम्णगण देश-विदेश से भी भाग लेने गाँधी मैदान, पटना आयेंगे।





देश के सभी राजनीतिक दल को भी ब्राह्मण महाकुंभ की जानकारी दी जा रही है तथा ब्राह्मणों की अतित-वर्तमान और भविष्य पर विचार करने के लिए आग्रह किया है। विभिन्न जेलों में बंद निर्दोष ब्राह्मण को न्याय दिलाने में परिवार अहम भूमिका निभायेगा। बिना कसूर का सजा काट रहे लोगों के साथ समाज खड़ा है। ब्राह्मण परिवार के साथ हो रहे अन्याय
को हम किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेंगे। ब्राह्मण नेता जो मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद एवं मुखिया-सरपंच हैं उनको भी यह कहना पड़ेगा की आप पार्टी से पहले ब्राह्मण हैं और हमारे कोटे से पद मिलने के बाद हमारी समस्याओं को निष्पादन करने की जिम्मेवारी भी आपकी है। 21 दिसम्बर 2019 को होटल मौर्या में भी अभिभावक जगनारायण त्रिवेदी ने "संसार में ब्राह्मणों का योगदान एवं जिम्मेवारी" पर विश्व स्तर का चिंतन सेमिनार का आयोजन किया है। देश के सभी राज्यों में ब्राह्मण मुखर होकर अपनी समस्या सरकार के समक्ष रख रहे हैं। हम भी आजाद भारत के जिम्मेवार मतदाता एवं नागरिक हैं और जितना अधिकार दलित एवं अल्पसंख्यकों का हैं उतना हमारा भी है। आज भी पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के साथ क्षत्रिय समाज ब्राह्मणों का सम्मान करता है लेकिन सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल हमारे आपसी सौहार्द को बिगाड़ना चाहती है। 12 अपैल 2020 इस आरोप को खारिज करने के लिए ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया गया है।
राज्य कार्यक्रम संयोजक डॉ० जितेन्द्र कुमार पाठक, चन्द्रप्रकाश तिवारी, जितेन्द्र मिश्र कौण्डिलय, ज्योति पाण्डेय,आनन्द कुमार मिश्र, मामा जितेन्द्र मिश्र, कन्हैया मिश्र, अनिल तिवारी, कमल किशोर त्रिपाठी, हिमांशु मिश्रा, राजीव शुक्ता,रीचा झा, पुष्पा त्रिपाठी, रजनीश तिवारी, मधुलय उपाध्याय, सागर उपाध्याय, ललन कुमार पाण्डेय, श्रीधर पाण्डेय, सुषमा मिश्र, राजमती पाण्डेय, सूरज पाण्डेय, अविनाश पाण्डेय, सुनील पंडा, राजीव रंजन चौबे, के के चौबे, महेन्द्र दीक्षित,दीलिप कुमार मिश्र, शैलेश तिवारी, शैलेन्द्र पाण्डेय, सूरज पाण्डेय, गायक भवानी कुमार पाण्डेय, अनिल तिवारी, महेश शर्मा, शिवानन्द गिरी, रामानुज तिवारी, माधव झा आजाद, आशीष झा, निलेश भारद्वाज, नवनीत दुबे, प्रभाकर चौबे, गोविन्द पाण्डेय. बालक 12 वर्ष का पवन किशोर पाठक ने भी अपने विचार रखें तथा 12 अप्रैल 2020 में होने वाले ब्राहम्ण महाकुंभ को 100 प्रतिशत सफल बनाने की सौगंध खाई।