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राजेंद्रसेतु के बंद होने से असर का विश्लेषण देखिये बिहार दर्पण न्यूज़ के साथ

राजेंद्रसेतु के बंद होने से असर का विश्लेषण देखिये बिहार दर्पण न्यूज़ के साथ




पटना ग्रामीण से रवि शंकर शर्मा की रिपोर्ट

राजेंद्रसेतु के मालवाहक वाहनों के लिये बंद होने के बाद के असर का विश्लेषण देखिये आज हमारे साथ।लोगों ने बताया कि सेतु के बंद होने के दस दिनों के अंदर ही सिर्फ मोकामा प्रखण्ड से हजार के आसपास मजदुर पलायन कर चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में हर रोज पलायन जारी है।हमारा चैनल लोकहित में कई बार बता चुका है कि सेतु के बंद होने से उत्तर और मध्य बिहार के लाखों लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से बेरोजगार हुये हैं।आलम यह है कि कई वाहन मालिक अंडा बेचने को मजबूर है तो कुछ तीन चार वाहनों के मालिक मजदूरी करने को विवश हैं।
पेट्रोल पम्प से लेकर ऑटो गैरेज और लाइन होटल तक ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं।
टाल जलजमाव से बेहाल है तो उद्योग धंधे वर्षो से बन्द पड़े हैं।ऐसे में एक मात्र जीविका ट्रांसपोर्ट उद्योग ही था जो सेतु के बन्द किये जाने से पूरी तरह ठप पड़ गया है।सड़कें और बाजार वीरान है। लोग मुख्यमंत्री की तरफ टकटकी लगाये बैठे हैं।एस डी एम ने पीपा पुल का सुझाव दिया है परन्तु पीपा पुल से मालवाहक वाहन का गुजरना खतरे से खाली नही होगा। ऐसे में पीपा पुल का कोई औचित्य नही बनता।मामला इतना गंभीर हो चुका है कि युवा अब शराब के कारोबार की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसी क्रम में आज मराँची थाना ने शराब बरामद किया हालाँकि युवक फरार हो गया। परन्तु यह आँख मिचौली कब तक?रोजगार छीन जाने का व्यापक असर लोगों पर पड़ा है। एक तो पलायन में अचानक तेजी से वृद्धि हुई है दूसरे युवा आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने लगे हैं। अब वाहन मालिक अंडर लोड चलने और दस टन की निर्धारित वहन क्षमता के साथ चलने के लिये शपथ पत्र तक देने को तैयार हैं और अब ऐसी भयावह स्थित में नौ जिले के लोगों का एक मात्र सहारा और उम्मीद मुख्यमंत्री ही हैं।