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मरकज की आड़ में मानवीयता की हत्या

मरकज की आड़ में मानवीयता की हत्या




"हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है" -- 
 कुछ ऐसी ही स्थिति हो गई है आज कल ,जब बात तबलीगी जमात और उससे मिले कोरोना के भेंट की होती है । पूरे देश में इन जमातों की मूर्खतापूर्ण हरकत के कारण  मरीजों  की  संख्या में चिंताजनक वृद्धि दर देखी जा रही है ।

आज जबकि पूरे विश्व पर यह संकट आन पड़ा है वैसे में मजहब का ढोल पीटने की बदहवासी की क्या जरूरत थी, ये किसी के भी समझ से परे है  । इस अदृश्य वायरस से युद्ध करने के लिए  सारे ज्ञान - विज्ञान और तर्क संघर्ष कर रहे हैं  ।अब  अदृश्य ईश्वर ही एकमात्र सहारा दिखाई देता है ।माननीय प्रधानमंत्री का निर्देश और उनके सलाह को धत्ता बताकर दो हजार के करीब की संख्या में निजामुद्दीन के मरकज में इकट्ठा होना कहीं न कहीं प्रशासन और संविधान का अपमान करना भी है । 

 इन अंधभक्त मौलवियों ने यह सिद्ध कर दिया कि उन्हें देश की भलाई और देश की जनता के जीवन की कोई चिंता नहीं है । धर्म के प्रति अंधी आसक्ति ने आज मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि कर दिया है और जिस तरह से ग्राफ बढ़ता चला जा रहा है वो हर किसी के लिए खतरे के घंटी की तरह है ।  
इतनी गैरजिम्मेदाराना हरकत किया गया है कि इसका वर्णन भी मुश्किल है ।  इन्होने इकट्ठे होकर नमाज पढा और अपने यात्रा की जानकारी को सबसे छुपाया । जब प्रशासन को जानकारी मिली और उन्हें इनकी और इनसे मिलने वाले लोगों के सेहत की फिक्र हुई तो ये
अस्पताल जाने के बजाय भाग खड़े हुए ।

इनकी पाशविक सोच  जब  प्रशासन को जानकारी मिली और उन्हें ले जाया गया ताकि उनका इलाज कराया जा सके और क्वॉरेंटाइन रखा जा सके तो वहां उनकी बदतमीजी और उनका असहयोग करने की प्रवृत्ति ने पूरे मानवता को शर्मसार कर दिया।

इतना ही नहीं बल्कि अस्पताल में उनका चिकित्सकों की सलाह नहीं मानना और नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार करने और खाने के लिए बिरयानी और मांसाहारी भोजन की मांग करने जैसे तौर तरीकों ने पूरी तरह यह साबित कर दिया है कि ये जमात एक सोची साजिश के तहत इस देश की नींव को खोखली करने में जुटी है ।  अब तो यह भी सुनने में आ रहा है कि जिन जमातियों को क्वॉरेंटाइन के लिए रखा गया है वो वहाँ पर बोतल में मूत्र भरकर बाहर फेंक रहे हैं ताकि वायरस जनता के बीच फैले।  

इस समय जब पूरा देश जीवन और मृत्यु की रेखा के बीच खड़ा है और हम सभी एक दूसरे के लिए चिंतित हैं ,  परेशान हैं ,  वैसे में इस तरह का व्यवहार यदि नहीं रोका गया तो गृहयुद्ध की स्थिति आ सकती है।  यदि इस तबलीगी जमात पर सवाल उठाया जाए तो यह समुदाय सांप्रदायिक बातों का रोना रोने लगता है और जब यह खुद पूरे देश के संविधान और पूरे देश की मान मर्यादा और संवैधानिक पद पर आसीन माननीय प्रधानमंत्री की बातों की भी अनदेखी करता हैं तो इसे यह अपना अधिकार मान लेता है । लगातार मीडिया में संचार के विभिन्न साधनों में इस बात को लेकर चर्चा और विचार-विमर्श का माहौल बना हुआ है और उन्हें इस बात पर भी आपत्ति है उनसे सवाल क्यों किया जा रहा है

 और उनको कठघरे में क्यों रखा जा रहा है ? इस्लाम धर्म के ठेकेदारों को काफी पीड़ा है इस बात की कि उनके तबलीगी जमात के जो धर्मावलंबी है उनके साथ सरकार गलत कर रही है, सख्ती कर रही है और उनके मान मर्यादा के साथ खेल रही है। गोया  देश की जनता के जान की कोई कीमत नहीं और इनके नमाज रमजान की ही कीमत है। इतना ही नहीं बल्कि इस्लाम धर्म के ठेकेदारों ने यह भी शिकायत दर्ज की है कि उनके संप्रदाय के लोग डरे हुए हैं और उनके जीवन के अधिकार का हनन किया जा रहा है । मीडिया पर इन्होंने इल्जाम लगाया है कि उनके कौम को अपमानित किया जा रहा है । जबकि अस्पतालों के रिकॉर्ड से स्पष्ट जाहिर है कि इन तबलीगी जमातियों की वजह से दिल्ली,  मुम्बई और उत्तर प्रदेश की स्थिति गंभीर हो गई है । पुलिस वालों और डॉक्टरों के साथ इनके दुर्व्यवहार को देखकर मन आहत होता है । जब देश की जनता पर संकट का बादल मंडरा रहा है वैसे में ये मानव बम बनकर बेलगाम घूम रहे हैं । इनके इतिहास और वर्तमान को देखते हुए लगता है कि अब सरकार को तबलीगी जमात पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगाने की जरूरत है  वरना ये लोग हिंदुस्तान को कब्रिस्तान बनाकर ही दम लेंगे ।

डॉक्टर कल्याणी कबीर 
  जमशेदपुर  (झारखंड)