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मोकामा में युवा बने बेसहारों का सहारा।

मोकामा में युवा बने बेसहारों का सहारा।


महानगरों और बड़े शहरों से मजदूरों का पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा।उनके घर वापसी का सिलसिला जारी है।सैंकड़ों किलोमीटर दूर से हजारों मजदूर प्रतिदिन पैदल आ रहे हैं।लोग भूखे प्यासे हैं,उनके पास न भोजन है न पैसे हैं।ऐसे में मोकामा के कुछ युवाओं ने उन बेबस और लाचार मजदूरों की मदद का बीड़ा उठाया है।
मोकामा नगरपरिषद के वार्ड संख्या 21 चिन्तामनीचक के रहने वाले युवा बित्तू सिंह,बन्दन सिंह,रमेश कुमार, रजलू,गुड्डू सिंह,गुल्लू,पिंटू कुमार, चंदन कुमार,राकेश,पंकज,प्रणव और कुछ अन्य साथी मिलकर पिछले चार दिनों से रास्ते से गुजरने वाले मजदूरों को भोजन करवा रहे हैं।बातचीत में बित्तू सिंह बताते हैं कि टेलीविजन और सोशल मीडिया के माध्यम पर मजदूरों की दशा देखकर खुद के इंसान होने पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी।ऐसे में हम सभी साथियों ने तय किया कि जबतक इस रास्ते से मजदूरों के गुजरने का सिलसिला नहीं थमता तब तक 24 घण्टे चिन्तामनीचक फाटक पर हमारे साथी लोगों को भोजन देने के लिए मौजूद रहेंगे।उन्होंने बताया कि भोजन तैयार करने के लिए शुद्धता एवं स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाता है।हर वक्त भोजन तैयार करने के लिए कारीगर मौजूद रहते हैं और कोशिश रहती है कि हर किसी को गर्मागर्म भोजन दिया जाए।मजदूरों के लिए भोजन,पानी की व्यवस्था है और उनसे पूछकर उन्हें भोजन के कुछ अतिरिक्त पैकेट भी दे दिए जाते हैं ताकि रास्ते में भी उन्हें भूखे न रहना पड़े।मजदूरों को और भी किसी चीज की आवश्यकता होती है तो उन्हें हर सम्भव मदद दी जाती है।

धीरज झा