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पैकेज के नाम पर धोखा मजदूरों के साथ अन्याय के खिलाफ माले कार्यकर्ताओ ने मनाया प्रतिवाद दिवस-माले

पैकेज के नाम पर धोखा मजदूरों के साथ अन्याय के खिलाफ माले कार्यकर्ताओ ने मनाया प्रतिवाद दिवस-माले


चितकोहरा में दो जगह पर हुआ प्रतिवाद एक चितकोहरा कार्यलय और ग्रामीण कार्यलय-माले

 भाकपा माले के द्वारा राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस के साथ फुलवारी चितकोहरा में भी मनाया गया केंद्र सरकार पैकेज के नाम पर मजदूरों के साथ धोखा ,क्वार टाइन सेंटर के नाम पर यातना  क्यों,इन नारो के साथ राज्यव्यापी प्रतिवाद मनाया गया जिसमें मुख्य रूप से पोलित ब्यूरो सदस्य अमर,केंद्रीय कमेटी सदस्य शशि यादव,खेमस नेता दिलीप सिंह ,टेम्पू यूनियन के नेता मुर्तजा अली ,आइसा राज्य सह सचिव आकाश कश्यप मुख्य रूप से
उपस्थित थे जिला भाकपा माले ग्रा. जिला कार्यालय में कॉमरेड अमर जी पोलितब्यूरो सदस्य सह जिला सचिव पटना एवं केंद्रीय कमेटी सदस्य शशि यादव आइरला  सह भाकपा माले नेता  दिलीप सिंह आज राष्ट्रब्यापी प्रतिरोध के क्रम में लॉकडाउन के प्रावधानों के तहत धरना पर बैठे हुए हैं, ज्वलन्त सवाल है कि* कोरेन्टाईन सेंटर के नाम पर यातना गृह क्यों?*राहत पैकेज के नाम पर धोखा क्यों?*प्रवासी मजदूरों की लगातार मौत क्यों?आदि अनेक सवालों से अगाह करना चाहते हैं कि कोरोना वायरस के आड़ में यह सब धन्धा अनुचित ही नहीं निंदनीय व शर्मनाक है, केंद्र की भाजपा सरकार कोरोना से प्रभावी ढंग से निबटने के बजाय अब इस संकट को गांवों की ओर ढकेल दिया है, जिन प्रवासी मजदूरों के कठिन कठोर मिहनत,खून-पसीने के बल पर बड़े बड़े उद्योगों से पूंजीपति अरबों-खरबों कमाकर सम्पति का विशाल ढेर जमा करते हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी देने के बजाय मरने के लिए छोड़ दिया है, भूख से व्याकुल प्रवासी बड़े बड़े शहरों, महानगरों को अलविदा कह पैदल ही अपने गांव चल पड़े हैं,केंद्रने 20 लाख करोड़ का पैकेज केवल धोखा है, इससे किसानों-मजदूरों को कोई राहत नहीं पहुंचा पायेगा, सरकार यातयात सुबिधा देने, भोजन-पानी देने,मदद करने के बजाय उनलोगों पर डंडे बरसा रही है, मातृभूमि आने के बाद भी कोरेन्टीन सेंटर में भी मानवीय व बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव दिखता है, जेल से भी बदतर स्थिति में जीने को मजबूर हैं, सैनिटाइजर, मास्क, दवा, मच्छरदानी, कपड़ा, बरतन वगैरह के मामले में भारी अनियमितता है, लॉक डाउन के बाद से ही हमारी पार्टी सरकारी खर्चे से सकुशल घर वापसी तथा पैकेज देने के लिए प्रवासी मजदूरों,ग्रामीण-शहरी गरीबों को 6 माह का मुफ्त राशन देने की मांग करती रही है, जबतक अपनी मातृभूमि एक एक प्रवासी सकुशल वापस नहीं आ जाते, कोरेंटाईन सेंटर से स्वस्थ होकर अपने अपने घर नहीं चले जाते तबतक हमारे ब्यापक कार्यकर्ता इन मांगों को बुलंद करते रहेंगे, सरकार से मांग करते हैं कि हर प्रवासी मजदूरों को 10 हजार रूपया और 3 माह का मुफ्त राशन दो,*लॉक डाउन की अवधि में सड़क- रेल हादसे-भूख से मर रहे मजदूरों के परिजनों को 50-50 लाख का मुआवजा दो, इसके अलावा भी किसानों कि समस्या, गरीबों को उजाड़ने से पहले बसाने कि ब्यवस्था करो।