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केजरीवाल का सभी फंसे प्रवासियों वासियों को नौकरी व रोजगार देने का भरोसा।

केजरीवाल का सभी फंसे प्रवासियों वासियों को नौकरी व रोजगार देने का भरोसा।

केजरीवाल का सभी फंसे प्रवासियों वासियों को नौकरी व रोजगार देने का भरोसा...

धीरज झा

पटना : दिल्ली में फंसे बिहार के प्रवासी मजदूरों कामगारों को वापस भेजने के लिए केजरीवाल सरकार और ट्रेनों का किराया देने को तैयार है । लेकिन राज्य की नीतीश सरकार अब और ट्रेनों को अनुमति नहीं देना चाहती । इधर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने फिर बिहार के प्रवासियों से कहा कि आप दिल्ली छोड़कर ना जाएं साथ ही यह भी भरोसा दिया कि लॉकडाउन का तू होने के बाद सबको नौकरी और रोजगार दिलाया जाएगा ।

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रवक्ता चंद्र भूषण ने एक बयान में यह जानकारी दी है । उल्लेखनीय है कि दिल्ली के विभिन्न शेल्टर होम में फंसे करीब 18,000 मजदूरों व कामगारों ने बिहार जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था । बाद में 8000 मजदूरों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा अच्छी देखभाल और लॉकडाउन खत्म होने के बाद नौकरी व रोजगार मुहैया कराने के आश्वासन पर बिहार लौटने के आवेदन को वापस ले लिया है । लेकिन करीब 10,000 मजदूरों कामगारों ने बिहार लौटने की इच्छा जाहिर की है । वे करीब 45 दिनों से शेल्टर होम में रह रहे हैं दिल्ली से 10000 मैं से 1200 लोगों को लेकर दो ट्रेन मुजफ्फरपुर पहुंच चुकी है यह भी उल्लेखनीय है कि इस ट्रेन का किराया भी केजरीवाल सरकार ने चुका दिया।

आप प्रवक्ता चंद्र भूषण ने कहा कि दिल्ली से अब कोई भी ट्रेन बिहार चलाने की अनुमति देने से नीतीश सरकार ने इंकार कर दिया है । उन्होंने अफसोस जारी करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी नीतीश जी अमानवीय दृष्टिकोण अपना रहे हैं और राजनीति कर रहे हैं ।

इसी बीच दिल्ली के उप मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नई अपील को दोहराते हुए आप प्रवक्ता ने कहा कि घर जाने के इच्छुक बिहार के प्रवासियों के लिए ट्रेन की व्यवस्था की जा रही है, घबराएं नहीं, थोड़े दिन धर्य रखें । उन्होंने यह भी कहा कि कंधे पर बच्चों बूढ़ों को लेकर सड़क पर पैदल घर ना जाए ऐसा देखकर तकलीफ होती है और यह खतरनाक भी है । ऐसा लगता है मानो सारा सिस्टम फेल हो गया है । चन्द्र भूषण ने फिर लॉकडाउन की वजह से दिल्ली में फंसे बिहार के प्रवासियों को आश्वस्त किया है कि उनकी सुरक्षा खाने और रहने की जिम्मेदारी केजरीवाल सरकार की है ।

उधर बिहार प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद रंजन सिंह ने प्रवासियों को लेकर भी बयान दिया है कि कोटा के छात्रों को बुलाया जा सकता है तो मजदूरों को उनके घर क्यों नहीं भेजा जा सकता ? भाजपा नेताओं ने गुजरात में प्रवासी मजदूरों से टिकट का पैसा ले लिया और टिकट भी नहीं दी । मांगने पर बुरी तरह उन मजदूरों-कामगारों को पीटा।
क्या यही है भाजपा का "गुजरात मॉडल" ?