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भारत सरकार/राज्य सरकारों की दो रंगी नीतियों का शिकार निजी विद्यालय ही क्यों ?  - शमायल अहमद.....

भारत सरकार/राज्य सरकारों की दो रंगी नीतियों का शिकार निजी विद्यालय ही क्यों ? - शमायल अहमद.....




पटना : निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाया है । बताते चलें कि असिस्टेंट कमिश्नर (वित्त) ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के सभी उपायुक्तों को 12 मई 2020 को पत्रांक संख्या F 110350/01/2020 के माध्यम से पत्र जारी कर सभी प्रमोटेड विद्यार्थियों का प्रथम तिमाही अप्रैल-मई एवं जून का शुल्क 22 मई से 21 जून 2020 तक लेने की बात कही है । तत्पश्चात पत्र में दूसरे तिमाही की फी भी वसूलने के लिए अंकित किया गया है ।

प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा कि इस वैश्विक कोरोना के संकट की घड़ी में एक तरफ केंद्रीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के माता-पिता या उनके अभिभावकों पर एकमुश्त 3 महीने की फीस की वसूली का आर्डर बोझ साबित हो नहीं हो । वहीं भारत राज्य/सरकारों ने निजी विद्यालयों के संचालकों को 3 महीने का फी एकसाथ नहीं देने की बातें कह रही है । जबकि देश के अधिकांश निजी विद्यालय किराए के भवनों में चल रहे हैं । ऐसी विषम परिस्थिति में 3 महीने का अभिभावकों से फी ना लेकर विद्यालय के भवनों का किराया, विद्युत बिल की राशि, वाहनों का रेट का किस्त का भुगतान, टीचिंग एवं नर्सिंग कर्मियों का समय पर वेतन भुगतान, के बोझ तले दबकर निजी विद्यालयों के संचालक कराह रहे हैं ।

निजी विद्यालयों के संचालकों की बढ़ती मुश्किलों को देखकर प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने सरकार की दोरंगे नीतियों की आलोचना कर, सरकार से राहत पैकेज की मांग की है । उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अपनी द्वारा की नीतियों से बाज आएं । इस विषम परिस्थिति में निजी विद्यालय सरकार की मदद कर रहे हैं । जिसका साफ उदाहरण निजी विद्यालयों में क्वॉरेंटाइन सेंटर स्थापित करना है। इसके अलावा जब भी सरकार के अधीन शिक्षा विभाग को परीक्षा आदि के संचालक के लिए भवन एवं फर्नीचर की आवश्यकता होती है, तो निजी विद्यालय के संचालक अपने यहां पठन-पाठन को स्थगित कर सरकार की मदद करते आए हैं । जिसके एवज में शिक्षा विभाग के द्वारा कोई भी शुल्क निजी विद्यालयों को नहीं दिया जाता 

चुनाव के समय जब भी सरकार को वाहनों की जरूरत होती है तो सबसे पहले निजी विद्यालयों के संचालक हमेशा तत्परता से मदद करते आए हैं । बावजूद समय-समय पर सरकार का साथ देने के लिए तत्पर निजी विद्यालय के संचालक विस्मय से सरकार की दोहरी मानसिकता का शिकार हो रहे हैं । अगर अभिभावक अपने बच्चों का फी का भुगतान समय पर निजी विद्यालयों को नहीं करेंगे तो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करने वाले निजी विद्यालय बंदी के कगार पर आ जाएंगे । यह एक गंभीर समस्या है जिसे राज्य सरकार अपनी दौरंगी नीतियों के कारण निजी विद्यालयों के संचालकों पर तलवारें तान खड़ी है । जिसे अभिभावकों को भी समझना होगा और समय पर अपने बच्चों की फी का भुगतान निजी विद्यालयों को करना होगा ।


धीरज झा की रिपोर्ट