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श्रावणी मेला आयोजन के मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला "इस साल नहीं होगा श्रावणी मेला का आयोजन, पूरे सावन महीने भर सिर्फ ऑनलाइन दर्शन की अनुमति।।

श्रावणी मेला आयोजन के मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला "इस साल नहीं होगा श्रावणी मेला का आयोजन, पूरे सावन महीने भर सिर्फ ऑनलाइन दर्शन की अनुमति।।

श्रावणी मेला आयोजन के मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला "इस साल नहीं होगा श्रावणी मेला का आयोजन, पूरे सावन महीने भर सिर्फ ऑनलाइन दर्शन की अनुमति।
झारखंड

शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट ने देवघर और बासुकीनाथ क्षेत्र में आयोजित होने वाले विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 2020 आयोजन के मामले में अपना फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कोरोना वायरस की वजह से फैली महामारी के कारण इस साल श्रावणी मेला स्थगित रखने का आदेश दिया है और पूरे सावन महीने भर सिर्फ ऑनलाइन दर्शन की अनुमति दी है। गौरतलब हो कि गोड्डा लोकसभा के सांसद निशिकांत दुबे ने मेला को नियम-शर्तों के साथ चालू करने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने सांसद के वकीलों के दावे को नहीं माना। श्रावणी मेला व कांवर यात्रा के मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह तय हो गया कि इस साल श्रावणी मेला का आयोजन नहीं होकर सिर्फ ऑनलाइन पूजा की जा सकेगी। इस मसले पर कोर्ट को जानकारी देने के लिए झारखंड सरकार के आपदा सचिव अमिताभ कौशल को अदालत में बुलाया गया था। विगत 30 जून को हाईकोर्ट ने प्रार्थी, राज्य सरकार और बाबा मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष का जवाब सुनने के बाद चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर राज्य सरकार की उच्चस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जारी अंतिम आदेश के मुताबिक 31 जुलाई, 2020 तक राज्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर सार्वजनिक पूजा या मेला के आयोजन की अनुमति नहीं है। शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट ने पीआईएल संख्या WP(PIL)/1753/2020 निशिकांत दुबे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के इस मामले में भारत सरकार, गृह मंत्रालय, झारखंड सरकार, डीसी, बाबा बैधनाथ श्राइन बोर्ड, पंडा धर्मरक्षिणी सभा और बिहार सरकार को पार्टी बनाया गया था। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कोरोना काल की इस परिस्थिति में इतने बड़े मेले का आयोजन सम्भव नहीं है। वैष्णो देवी और बालाजी की तर्ज पर वर्चुअल यानि ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था करने का निदेश कोर्ट ने दिया।