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पटना (बिहार) : युवा मांगे रोजगार नहीं तो दो हर महीने 10 हजार।।

पटना (बिहार) : युवा मांगे रोजगार नहीं तो दो हर महीने 10 हजार।।

 *पटना (बिहार) : युवा मांगे रोजगार नहीं तो दो हर महीने 10 हजार।



पटना 

केंद्र के मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज देश एतिहासिक संकट के दौर से गुजर रहा है। सरकार के बेतुका नोटबंदी, अतार्किक जीएसटी के कारण पहले से तबाही झेल रहे देश के छत्र-नौजवान, किसान, खेतिहर मजदूर, छोटे-मध्यम कारोबारी, बिना प्लानिंग के लॉकडाउन के कारण और भी तबाह हो गए हैं। हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा करके सत्ता मे आई नरेंद्र मोदी सरकार नए रोजगार का सृजन करना तो दूर पहले से भी मौजूद रोजगार के अवसरों को खत्म करते जा रही है। बेरोजगारी के मामले में आजाद भारत में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। आजादी से लेकर अब तक जीतने भी पब्लिक सैक्टर यूनिट्स बने, कायदे से उनका और भी विस्तार होना चाहिए था, उनको एक-एक करके बेचा जा रहा है। मोदी सरकार ने एक साथ ही भारतीय रेल के साथ-साथ दर्जन भर पीएसयू जैसे कोल इंडिया, बीपीसीएल, एलआईसी, बीएसएनएल, एमटीएनएल, एयर इंडिया, ओएनजीसी, बीएचईएल, गेल इंडिया लिमिटेड एचपीसीएल, को बेचने का काम शुरू कर दिया है। 


वहीं मोदी सरकार ने आते ही विद्यार्थियों/शिक्षा/शैक्षणिक संस्थानों पर इस तरह से हमले शुरू किए जैसे मानों शिक्षा क्षेत्र से इनकी कोई पुरानी दुश्मनी हो। अभी हाल में ही कोरोना महामारी के बीच में मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति 2020 के ड्राफ्ट को पास किया है। यह शिक्षा नीति शिक्षा जगत को नीलामी की मंडी में तब्दील करने वाला है। यह नीति, शिक्षा देने की सरकारी जिम्मेदारी को खत्म कर शिक्षा को बाजार में बिकने की चीज बना देगा। ऐसे में ऊंची दामों पर शिक्षा खरीद ना पाने वाले करोड़ों-करोड़ विद्यार्थी बेदखल हो जाएंगे। इसलिए आइसा-आरवाइए इस शिक्षा नीति 2020 के आधार पर किसी भी तरह का कानून बनने की इजाजत नहीं देगा और डट कर विरोध तेज करेगा। 


महामारी के बीच में ही हमने देखा लाखों विद्यार्थियों-अभिभावकों की मांग थी कि मेडिकल, इंजीनियरिंग से लेकर सेमेस्टर की परीक्षाओं को आगे बढ़ा दिया जाय क्योंकि परीक्षा से ज्यादा जरूरी विद्यार्थियों की जान है। सरकार इस मांग को ठुकराते हुए परीक्षाओं की घोषणा कर दी। ऐसा करना विद्यार्थियों के साथ सरकार के संवेदनहीनता को दिखाता है। सरकार के इस रवैये से देशभर के छात्र गुस्से में हैं और आंदोलन कर रहे हैं, आइसा-

आरवाइए इस आंदोलन की अगली कतार में शामिल है।


सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने शिक्षा-रोजगार पर संगठित हमला शुरू कर दिया। आइसा-आरवाइए ने शुरुआत से ही इन हमलों का डटकर मुकाबला किया है। हमने देश भर के छात्रों-नौजवानों को संगठित करते हुए ‘यंग इंडिया’ नाम से एक मंच बनाया और देश भर में इन हमलों के खिलाफ आंदोलन संगठित किया। देश भर से 100 से अधिक संगठनों व आंदोलनों के इस मंच में 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भी देश की राजधानी दिल्ली में दासियों हजार छात्र-नौजवानों के ‘यंग इंडिया अधिकार मार्च’ को संगठित किया। इस साल के शुरुआत में ही हमने सीएए-

एनआरसी लाकर देश को बांटने की साजिश का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली में मार्च किया। 


आज यह लड़ाई और भी मजबूत और आक्रामक रूप ले रहा है। आज देश भर के छात्र-नौजवान इस लड़ाई का हिस्सा बन चुके हैं। पिछले 5 सितंबर को देशभर के करोड़ों लोगों ने ताली-थाली बजाकर शिक्षा-रोजगार के आंदोलन को समर्थन दिया है। 9 सितंबर को भी इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला। आगे आने वाले दिनों में यह आंदोलन भाजपा व भाजपा समर्थित सरकार को उखाड़ फेंकने में भी कामयाब होगा।


इस आंदोलन की धमक ने वैसी पार्टियों को भी साथ आने पर मजबूर किया है जो कभी भी इन आंदोलनों को महत्व नहीं देते थे। ऐसी पार्टियों का स्वागत है लेकिन यह आक्रोश व आंदोलन उनके द्वारा किए गए कारनामों को भी याद रखेगा। भारतीय रेलवे को बेचने के प्लानिंग के साथ ही सरकार ने रेलवे के 50 प्रतिशत पदों को खत्म कर दिया। रेलवे में जहां 50 हजार बहाली हर साल होती थी जो पुराने पदों के अनुसार 6 साल में कम से कम 3 लाख लोगों को अभी तक नौकरी मिल जानी चाहिए थी उसका हाल ये है की पिछले 6 साल में मात्र 1.5 लाख पदों पर बहाली के लिए आवेदन लिया गया है लेकिन अभी तक इसकी कोई परीक्षाएं नहीं ली गई है। साथ ही साथ जिस आवेदन का शुल्क पहले 50 रुपया हुआ करता था अब बढ़ा कर उसे 500 रुपया कर दिया गया। 


सीबीआईटीसी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस) करीब 38586 (42 प्रतिशत) पद खाली हैं। 2019 में सीजीएल 2017 के 1650 पदों को खत्म कर दिया गया। इसके आलवे दिल्ली पुलिस, आयकर विभाग, सेंट्रल एक्साइज विभाग, जल आयोग, कॉर्पोरेट अफेयर्स, प्रत्यक्ष कर विभाग, सांख्यकी मंत्रालय, रक्षा विभाग, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, कैग में लाखों पद खाली हैं। 


इसके अलावे असंगठित क्षेत्र में करोड़ों लोग बेरोजगार हुए हैं जिनके लिए मोदी सरकार का राहत पैकेज महज हवाबाजी साबित हुआ। आज असंगठित क्षेत्र में अपनी नौकरियाँ गँवाने वाले लोगों के सामने भुखमरी की समस्या पैदा हो गई है। बिहार-

उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में पिछले दिनों जो भी रही-सही वैकेसिंया निकली हैं सबके सब लीक-लूट-सेटिंग के भेंट चढ़ गईं हैं। उत्तरप्रदेश का 69000 शिक्षक बहाली हो या बिहार का दारोगा, एसटीईटी से लेकर टोपर घोटाला तक ने तो इस दुनिया का नया कीर्तिमान ही स्थापित कर लिया। 


सरकारों के द्वारा रोजगार छीनने व रोजगार के अवसर सृजित करने वाले संस्थाओं को बेचने के इस खतरनाक माहौल में देश के नौजवानों ने भी ठान लिया है अब आर होगा पार। अब रोजगार मिलेगा या सरकार जाएगी। देश में जहां-जहां भी चुनाव होगा देशभर के नौजवान पूरी ताकत से सरकार को उखाड़ फेंकेगे जिसने नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।आने वाले महीने में बिहार का चुनाव संभावित है, 15 साल से नीतीश कुमार के शासन में रोजगार के नाम पर नौजवानों को सिर्फ ठगी हाथ लगी है। प्रदेश में ना कोई कल-कारखाने लगे ना ही रोजगार के अन्य अवसरों का सृजन हुआ। देश के नौजवानों ने ठान लिया है कि इस चुनाव में भाजपा की गोद में बैठी नीतीश सरकार को करारा जबाव मिलेगा और नौजवानों से की गई गद्दारी के लिए इनको उखाड़ फेंका जाएगा। 


हम जानते हैं कि दशकों से बिहार में सत्ता के केंद्र में छात्र आंदोलन से निकले हुए लोग ही रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इसी समय बिहार के स्कूलों-कॉलेजों-विश्वविद्यालयों का बुरा हाल हुआ है। आज बिहार की शिक्षा व्यवस्था इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर गुणवत्ता के सभी मापदंडों में देश मे सबसे पीछे है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने रोजगार के लिए कोई नए अवसर सृजित तो नहीं ही किया बल्कि पहले से भी जो अवसर मौजूद थे उसे भी खत्म कर दिया। नए कल-कारखाने खोलने की बात तो दूर पुराने कई कल-कारखाने बंद हो गए। सरकारी क्षेत्र में जो भी नौकरियां थीं उसे भी ठेका मानदेय पर बहाली कर संभावनाओं को भी खत्म कर दिया गया। 


नीतीश सरकार की नाकामियों के चलते आज बिहार में चारों ओर निराशा व आक्रोश का माहौल है। आशा कार्यकर्ताओं से लेकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं, स्कूलों में खाना बनाने वाली रसोइया, स्कूल-कॉलेज के शिक्षक-कर्मचारी, किसान, मजदूर, छोटे-मध्यम कारोबारी, छात्र-नौजवान तक सभी आंदोलन कर रहे हैं और इस आने वाले चुनाव में नीतीश-भाजपा को सबक सिखाने व सत्ता से उखाड़ फेंकने का मन बना रहे हैं। इस चुनाव में बिहारियों की तरफ से नीतीश-भाजपा को करारा जबाब मिलेगा। 


*14 सितंबर:* संसद सत्र शुरू होने के पहले दिन आइसा - आरवाइए का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन। 14 सितंबर को देश भर में छात्र-युवा नई शिक्षा नीति 2020 वापस लेने, कोरोना काल में स्कूल/कॉलेज के सभी विद्यार्थियों का फीस माफ करने, केंद्र की मोदी सरकार व नीतीश सरकार ने कितने लोगों को रोजगार दिए और कितने के छीने, पर श्वेतपत्र लाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे। 


*17 सितंबर*  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश भर के छात्र-नौजवान मनाएंगे ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’. नरेंद्र मोदी इस देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके कार्यकाल में रोजगार इतना बुरा हाल जितना पहले कभी नहीं हुआ था इसलिए इनके जन्मदिन को ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ के रूप में मनाया जायेगा. नए रोजगार का सृजन करने की बात तो दूर पहले से भी जो रोजगार के अवसर मौजूद थे उसको भी खत्म किया जा रहा है। इस मौके पर देशभर मे मशाल जुलूस निकाला जाएगा। 


*28 सितंबर* शहीदे आजम भगत सिंह के जन्मदिन के मौके पर आइसा-आरवाइए देशभर में रोजी-रोटी-रोजगार! भगत सिंह-अम्बेडकर की है दरकार!! नारे के साथ जिला से लेकर पंचायत स्तर तक “रोजी-रोटी-रोजगार” मार्च निकलेगा। इस मार्च के माध्यम से हम भगत सिंह-अम्बेडकर शहरी रोजगार गारंटी एक्ट बनाने और सभी बेरोजगार नौजवानों के लिए भगत सिंह- अम्बेडकर बेरोजगारी भत्ता देने की मांग करेंगे। 



*संवाददाता सम्मेलन में शामिल नेतागण*

मौक़े पर संदीप सौरभ, आइसा, राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार, आरवाइए, राष्ट्रीय महासचिव मनोज मंजिल, आरवाइए, राष्ट्रीय अध्यक्ष सबीर कुमार, आइसा, बिहार प्रदेश सचिव सुधीर कुमार, आरवाइए, बिहार प्रदेश सचिव आकाश कश्यप, रेलवे भर्ती आंदोलन संयोजक आलोक यादव, एसटेट रोजगार आंदोलन में शामिल थे।

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