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पटना (बिहार) : किसान बिल के विरोध में आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने किया विरोध प्रदर्शन।

पटना (बिहार) : किसान बिल के विरोध में आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने किया विरोध प्रदर्शन।

पटना (बिहार) : किसान बिल के विरोध में आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने किया विरोध प्रदर्शन।


रिपोर्ट: बिहार झारखंड ब्यूरो चीफ़ धीरज झा


पटना : भारी विरोध के बावजूद असंवैधानिक तरीके से संसद में पारित हुए किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार को चौतरफा घेरने के लिए सड़क पर संघर्ष किया। किसान बिल के विरोध में आप सांसद संजय सिंह राज्य सभा परिसर में ही चादर और तकिया लेकर धरने पर बैठे। दू


सरी तरफ आम आदमी पार्टी ने बिहार सचिव श्रीवत्स पुरषोत्तम के नेतृत्व में राजधानी पटना में इनकम टैक्स गोलम्बर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। 

भाजपा सरकार के किसान विरोधी बिल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी बिहार के प्रदेश प्रवक्ता बबलू कुमार प्रकाश ने इसे काला कानून बताया और कहा कि किसानों की फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने, किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को पूरा करने में नाकाम मोदी सरकार किसानों को पूँजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, "आए दिन आत्महत्या कर रहे किसानों का दुख दर्द सुनने के बजाए, पूरे कृषि क्षेत्र को पूजीपतियों के हवाले करने की साजिश है यह किसान विरोधी बिल।

उन्होंने कहा देश में किसानों की हालत पहले से ही बदतर है। प्रदेश की सरकार किसानों को खाद बीज बिजली पानी उपलब्ध करवाने में असमर्थ है न ही गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान हो रहा है। प्रदेश का किसान आत्महत्या को मजबूर है। ऐसे समय भी मोदी सरकार पूंजीपतियों के साथ खड़ी है। बबलू ने कहा आम आदमी पार्टी हमेशा किसानों के हक में खड़ी है और उनके साथ अन्याय नहीं होने देगी।

प्रदेश सचिव श्रीवत्स पुरुषोत्तम ने किसान बिल पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मोदी  सरकार किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। हम इसके खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार को उन 80 प्रतिशत लोगों की कोई चिंता नहीं है। जो गाँव में रहते हैं और कृषि पर निर्भर हैं। एमएसपी ऑर्डिनेंस बिल इस बात का जीता जागता प्रमाण है।

पार्टी नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि कृषि को प्राइवेट हाथों में देने के लिए यह बिल लाया गया है। इस बिल के कारण धान और गेहूं की एमएसपी खत्म हो जाएगी। बिल के माध्यम से सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को कृषि सेक्टर को हड़पने की खुली छूट दे दी है। केंद्र सरकार द्वारा एयरपोर्ट, एलआईसी, बैंक, एयर इंडिया बेचने के अलावा रेलवे का निजीकरण करने पर नाराजगी जताते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी इस किसान अध्यादेश के माध्यम से किसानों की खेती को भी छीनना चाहते हैं।

'आप' चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ पंकज गुप्ता ने कहा कि- इस बिल के पास होने से बड़े-बड़े पूंजिपतियों को कृषि क्षेत्र में आने का मौका मिलेगा। 10-20 एकड़ जमीन के क्लस्टर बनेंगे और पूंजीपति कहीं से भी फसल खरीद कर, देश में कहीं भी उसका भंडारण कर सकेंगे। आपको बता दें कि इस अध्यादेश के पारित होने के बाद किसी भी जरूरी वस्तु को कहीं भी इकट्ठा करने, जरूरी वस्तुओं का जितना चाहे उतना भंडारण करने और जब मन चाहे उसे बेचने की स्वीकृति मिल गई है।

रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के उपज, व्यापार और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से संबंधित दो विधेयक पेश किए थे, जिसका विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे भारतीय जनतंत्र के लिए काला कानून कहा था। साथ ही “सड़क से लेकर संसद तक” इस विधेयक के विरोध में प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। पूरे विपक्ष और सहयोगी अकाली दल के विरोध के बाद भी राज्यसभा से इस विधेयक को पास किए जाने के विरोध में सदन में जम कर हंगामा हुआ था।

मौके पर पटना जिला अध्यक्ष चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव, अरुण रजक, राजेश सिन्हा, सुयश कुमार ज्योति, अर्जुन ठाकुर, उमा दफ़्तुआर, दिलीप झा, संजीव कुमार, अंजनी पोद्दार, शैल देवी, सन्नी कुमार, सतीश कुमार, अमित कुमार, रंजीत सिंह, रवि कुमार, कृष्ण मुरारी गुप्ता मौजूद रहे।

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