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जमशेदपुर (झारखंड) : पुलिस पर पुलिस का प्रहार,अब विधानसभा में गूंजेगा पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज का मामला।।

जमशेदपुर (झारखंड) : पुलिस पर पुलिस का प्रहार,अब विधानसभा में गूंजेगा पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज का मामला।।

 जमशेदपुर (झारखंड) : पुलिस पर पुलिस का प्रहार,अब विधानसभा में गूंजेगा पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज का मामला*



By: बिहार झारखंड ब्यूरो चीफ धीरज झा


रिपोर्ट: जमशेदपुर ब्यूरो चीफ दीपक कुमार



जमशेदपुर : जी हां, झारखंड की राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत खाकी वर्दी वालों पर दूसरें खाकी वर्दी धारियों ने जमकर लाठियां बरसाईं। जिसमें कई दर्जन सहायक पुलिस कर्मियों समेत झारखंड पुलिस के जवान घायल हो गये। महिला सहायक पुलिसकर्मियों को भी चोंटे आयीं हैं। आंदोलनरत सहायक पुलिस कर्मियों को खदेड़ने के लिए न सिर्फ लाठी चार्ज किया गया बल्कि आंसू गैस के गोले भी दागे गए। एक बारगी पूरा क्षेत्र रणभूमि में तब्दील हो गया। भगदड़ की स्थिति में जहां - तहां जूते -चप्पल बिखरे पड़े थे। 

बताते चले कि आंदोलनरत सहायक पुलिस कर्मियों को तनिक भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वो इस कदर अपने (वर्दीधारियों) से पिटेंगे। 



दरअसल पिछले एक सप्ताह से लगभग 1500 की भारी तादाद में सहायक पुलिस कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत है। जिसमें महिला एवं पुरुष सहायक पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस कोरोना संकट काल में ये सहायक पुलिस कर्मी अपनी मांगों को लेकर रांची के मोरहाबादी मैदान में डटे हुए हैं। इन सबों की मनसा आर या पार की लड़ाई लड़ने की है। सरकार के तरफ से कोई ठोस निर्णय नहीं होता देख नाराज सहायक पुलिस कर्मी शुक्रवार को सीएम आवास एवं राज भवन का घेराव करने के लिए कूच कर दिये। आंदोलनरत सहायक पुलिस कर्मी नारा लगाते हुए आगे बढ़ने लगे। आगे इन आंदोलनकारी सहायक पुलिस कर्मियों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ दिया गया। जिससे पूरी घटना पर नजर गड़ाए बैठे वरीय पुलिस अधिकारियों एवं मैजिस्ट्रेट के आदेश पर भीड़ के उग्र को कम करने तथा तितर - बितर करने के उद्देश्य से लाठी चार्ज के साथ आंसू गैस छोड़ने का आदेश दे दिया गया। फिर तो हालात एक घंटे के लिए बेकाकू हो गया। दर्जनों पुलिस वाले लाठीचार्ज एवं भगदड़ में घायल हो गए। जिसमें महिलाएं एवं बच्चें भी शामिल है। आंदोलनरत सहायक पुलिस कर्मियों का आरोप है कि सरकार पुलिस वालों को पुलिस से पिटवाकर सिपाही विद्रोह जैसी घटना को चरितार्थ करने की कोशिश में लगी है। गौरतलब है कि इन पुलिस कर्मियों ने निश्चित सेवा शर्तों के मुताबिक तीन वर्षों का सेवाकाल पूरी कर लिये हैं। अब इन्हे भविष्य की चिंता है। ऐसे में सरकार से ये पुलिसकर्मी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी समेत अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। 


*सहायक पुलिस कर्मियों के समर्थन में आयी भाजपा*


झारखंड में आंदोलनरत सहायक पुलिस कर्मियों के समर्थन में भाजपा खुलकर आ गयी है। पिछले दिनों पूर्व सीएम रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश , सांसद संजय सेठ आदि आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों से मिलकर उनका हालचाल जाना लिया था। सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इन सहायक पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई के बजाय समाधान ढूंढने पर विचार करने का अनुरोध किया था। इस बीच शुक्रवार को आंदोलन हिंसक रूप ले लिया। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पुलिस को पुलिस से पिटवाकर सरकार अपना बर्बर चेहरा उजागर कर दी है। एक साल में पांच लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा करने वाली हेमंत सरकार बदले में लाठियां और आंसू गैस से प्रहार कर रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जुल्मी सरकार की अंत की शुरुआत हो चुकी है। उधर पूर्व मंत्री सह विधायक भानुप्रताप साही, विधायक अमित मंड़ल, किशुन दास, इंद्रजीत महतो घायल सहायक पुलिस कर्मियों से मिलकर वस्तु स्थिति का जायजा लिया तथा लाठीचार्ज की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सहायक पुलिस कर्मियों द्वारा भाजपा विधायकों को एक मांग पत्र सौंपा गया। विधायकों ने एक स्वर में कहा कि यह मामला विधानसभा में रखा जाएगा तथा सरकार से जवाब मांगा जाएगा।


*जानिए खाकी वर्दीधारियों की पिटाई पर किसने क्या कहा ...*


रघुवर दास (पूर्व सीएम, झारखंड) - नक्सलियों एवं अपराधियों के सामने पस्त झारखंड सरकार अपने डंडे का जोर निहत्थे सहायक पुलिस कर्मियों पर आजमा रही है। यह राज्य सरकार की दमनकारी नीति है। घटना घोर निंदनीय है। 


संजय सेठ (सांसद,भाजपा) - अपनी नौकरी बचाने के लिए झारखंड सरकार से इंसाफ मांग रहे सहायक पुलिस कर्मियों पर की गई बर्बरता पूर्ण कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है। 


जयदीप आईच ( पंचायत स्वयंसेवक ) -  माननीय मुख्यमंत्री हेमंत दादा आप ऐसे कैसे बदल गए ? एक साल पहले आपने ही मेरी आवाज को बुलंद किया था । फिर आज ऐसी क्रूरता क्यों हमारी बहनों के साथ ? क्या सत्ता सबको मजबूर कर देता है? 


लूईस मरांडी (भाजपा नेत्री) - अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हमारे आदिवासी- मूलवासी सहायक पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज एवं आंसू गैस का प्रयोग करना घोर निंदनीय है। धिक्कार है ऐसी सरकार पर।


भानुप्रताप साही (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक) - हक के बदले लाठी महंगा पड़ेगा। पुलिस से पुलिस को पिटवाना महंगा पड़ेगा। विधानसभा में सरकार को जवाब देना होगा।

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