Headlines
Loading...
जाह्नवी ई-जर्नल का लोकार्पण करते जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी

जाह्नवी ई-जर्नल का लोकार्पण करते जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी




राम का अर्थ ही राष्ट्र मंगल है-जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने जाह्नवी ई शोधपत्रिका के अभिनव अंक का किये लोकार्पण

 चित्रकूट स्थित अपने आश्रम से वर्चुअल लोगों को किये सम्बोधित

 दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो.शशिनाथ झा हुए समारोह में सम्मिलित

लोकार्पण कार्यक्रम में सम्मिलित शिक्षाविद व अन्य


भारत सरकार के पूर्व शिक्षाविद् सदस्य डॉ. सदानन्द झा के मुख्य सम्पादकत्व में सारस्वत निकेतनम् के अधीन प्रकाशित प्रथम संस्कृत ई-जर्नल जाह्नवी के 42 एवं 43 संयुक्तांक का

जगद्गुरु रामभद्राचार्यजी महाराज ने अपने कर-कमलों से लोकार्पण किये ।

जाह्नवी पत्रिका के सदस्य सह कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी डॉ.रामसेवक झा ने बताया कि चित्रकूट स्थित अपने आश्रम में पद्मभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने जाह्नवी ई-जर्नल के अभिनव अंक का लोकार्पण करते हुए कहा कि जिस तरह भगीरथी गंगा सतत प्रवाहमान है उसी प्रकार यह जाह्नवी ई-शोध पत्रिका संस्कृत जगत में शोध के क्षेत्र में नूतन आयाम प्रदान करती रहेगी । लोकार्पण के उपरांत श्रीरामचंद्र का राष्ट्रवाद पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए स्वामी जी ने कहा कि  श्रीराम के बिना संपूर्ण राष्ट्र की संकल्पना ही नहीं की जा सकती । अर्थात प्रभु श्रीराम से ही हमारा राष्ट्र है न कि राष्ट्र से श्रीराम । रामायण का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम का संपूर्ण जीवन ही राष्ट्र की सेवा में समर्पित रहा है, जिसे आज के राजनेताओं को सीख लेनी चाहिए । साथ ही कहा कि सेक्युलरिज्म का अर्थ धर्मनिरपेक्षता नहीं संप्रदाय निरपेक्षता है क्योंकि बिना धर्म धारण किए मूल्यों को धारण किए हम जीवित नहीं रह सकते ।

वहीं दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो.शशिनाथ झा ने अपने संबोधन में पत्रिका की भूरिश: प्रशंसा करते हुए शास्त्रों में कोरोना से बचने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा किये ।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रतीक्षा मिश्रा व संतोष झा के मंगलाचरण से हुई । प्रास्ताविक भाषण डॉ.सदानंद झा तथा स्वागत भाषण डॉ.मुरली मनोहर पाठक ने किया । जबकि आशीर्वचन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राजाराम शुक्ल, दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा, प्रो.ब्रजभूषण ओझा,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रो.रमेश सिंह गौर, आकाशवाणी के बलदेवानंद सागर, मद्रास विश्वविद्यालय के प्रो.पी नरसिंहम ने अपने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये । कार्यक्रम का संचालन डॉ.मीनाक्षी जोशी तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीलाल बहादुर संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने किया ।

कार्यक्रम में दरभंगा के डॉ.त्रिलोक झा, शांतिनिकेतन पश्चिम बंगाल के विभागाध्यक्ष प्रो.हरेकृष्ण,गोविंद शुक्ला, अभिलाषा कुमारी, भाग्यश्री,धनंजय झा, धर्मेंद्र दास, डॉ.जयप्रकाश नारायण,डॉ.ज्योति, डॉ.प्रदीप कुमार, डॉ.वीणा गौर, डॉ.सुमन आचार्य,हनुमंत चंद्र,इमराना प्रवीण, जनाश्री साहु, मृत्युंजय बोडले, नीमी कुमारी, परमानंद सरस्वती, राघव झा, राघवेन्द्र राघव, शैलेंद्र खैरे, सारस्वत मिश्र, श्रीधर जोशी, सुनीता,विकास त्रिपाठी,विपिन त्रिपाठी, धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी सहित देश-विदेश के ख्यातिलब्ध कुलपतियों, शिक्षाविद सदस्यों व दर्जनों शोधार्थी सम्मिलित थे । कार्यक्रम की समाप्ति डॉ. श्लेषा सचिन्द्र के शांति पाठ से हुई ।

0 Comments: