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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय मे वेदना सार्वभौमिकत्वम् बिषयाश्रित एकदिवसीय वेबिनार का आयोजन

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय मे वेदना सार्वभौमिकत्वम् बिषयाश्रित एकदिवसीय वेबिनार का आयोजन

 



आज दिनाङ्क – 10-10-2020 ई. को कामेश्वरसिंह दरभङ्गा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभङ्गा के स्नातकोत्तर वेदविभाक की ओर से दिन में 11 बजे से 01 बजे तक Google Meet के माध्यम से वेदानां सार्वभौमिकत्त्वम् विषयाश्रित एकदिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार की अध्यक्षता कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने की। विशिष्टातिथि के रूप में कामेश्वरसिंह दरभङ्गा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभङ्गा के पूर्व कुलपति प्रो.उपेन्द्र झा ,मुख्यातिथि के रूप में ल.ना.मि.वि.वि. के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. जीवानन्द झा , सारस्वतातिथि के रूप में कामेश्वरसिंह दरभङ्गा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभङ्गा के अध्यक्ष छात्रकल्याण प्रो. शिवाकान्त झा ,  मुख्यवक्ता के रूप में श्रीलालबहादुरशास्त्रीक्रेन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालय के  प्राचार्य प्रो.रामानुज उपाध्याय तथा उपाचार्य डॉ.सुन्दरनारायण झा उपस्थित हुए। 

कार्यक्रम के संयोजक स्नातकोत्तर वेदविभाग के सहायक प्राचार्य डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र  थे । 

मङ्गलाचरण विभागीय सहप्राचार्य डॉ.सत्यवान कुमार ने किया जवकि स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन की जिम्मेवारी वेदविभागाध्यक्ष प्रो.विद्येश्वर झा ने निभाई अन्त में वेदविभागीय सहप्राचार्य डॉ.विनय कुमार मिश्र ने धन्यवादज्ञापन किया। वेबिनार में कुल 155 प्रतिभागियों ने पञ्जीकरण करवाया जबकि उपस्थित होने वाले प्रतिभागियों की सङ्ख्या – 90 के लगभग रही। वेबिनार में टेक्निकल सहायता के लिए स्नातकोत्तर ज्यौतिष विभागीय सहायक प्राचार्य डॉ. वरुण कुमार झा तथा विभागीय छात्र राज कुमार तिवारी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। 

विद्वानों का उद्बोधन

1.विशिष्टातिथि के रूप में का.सिं.द.सं.वि.वि. के पूर्व कुलपति प्रो. उपेन्द्र झा ने श्रौत-सूत्र एवं गृह्यसूत्र में प्रतिपादित याज्ञिक विधियों में वेदों की सार्वभौमिकता को व्याख्यायित करते हुए उसकी उपादेयता को सिद्ध किया। 

2. मुख्यातिथि के रूप में डॉ.जीवानन्द झा , स्ना. संस्कृत विभाग ल.ना.मि.वि.वि.दरभङ्गा द्वारा आधुनिक विज्ञान में वेदों की सार्वभौमिकता को प्रमाणित किया। साथ ही उन्होंने वैदिक-विज्ञान का आधुनिक-विज्ञान पर हुए प्रभावों को सिद्ध किया।

3. प्रमुख वक्ता  के रूप में प्रो.रामानुज उपाध्याय ने संस्कृतवाङ्मय के सभी ग्रन्थों को वेदानुमोदित बतलाया तथा वैदुष्यपूर्ण रीति से वेदों की सार्वभौमिकता को सिद्ध करने का सफलतम प्रयास किया। 

4. प्रमुख वक्ता के रूप में ही  डॉ. सुन्दर नारायण झा ने वैदिक संहिताओं एवं श्रौतसूत्रों में प्रतिपादिक यज्ञों में वैदिकवाङ्मय की सर्वव्यापकता को प्रमाणित किया तथा वैदिक वाङ्मय के अनुशीलन से ही सम्पूर्ण विश्व में कल्याण सम्भव है के औचित्य को प्रदर्शित किया। 

5. प्रो.शिवाकान्त झा – डॉ. झा ने ज्यौतिष शास्त्रों पर वैदिकवाङ्मय की सार्वभौमिकता एवं उसकी उपादेयता पर दृष्टिपात किया तथा वेदों के उपकारक के रूप में ज्यौतिष शास्त्र को रेखाङ्कित किया।

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