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मैथिली भाषा का प्रयोग नहीं किया। तो बहिष्कार भी किया जाएगा।।।

मैथिली भाषा का प्रयोग नहीं किया। तो बहिष्कार भी किया जाएगा।।।

 मैथिली भाषा का प्रयोग नहीं किया। तो  बहिष्कार भी किया जाएगा।।।



मैथिली को आवाज चाहिए और यह आवाज आम लोगों के तरफ से मिलना शुरू हो गया है। यही प्रयास पिछले कुछ वर्षों से साहित्याङ्गन और बाद में चलकर मैथिली शिक्षा संघर्ष मोर्चा का रहा है।  चालू विधानसभा चुनाव में मैथिली राजनीतिक मुद्दा के रूप में उठ कर खड़ा हुआ है। इससे पहले कभी भी मैथिली चुनाव के वक्त इतना मुखर नहीं हुआ था। और इस आंदोलन के बदौलत मैथिली को सरकारी दल के द्वारा नोटिस भी लिया जाने लगा है। इसी मकसद से पिछले कई दिनों से बैठक दर बैठकों का दौर चल रहा था।


परिणाम स्वरूप झंझारपुर के अशो नगर में मैथिली मुद्दा को लेकर विभिन्न संगठनों की एक बैठक आयोजित हुई। जिसमें जोर शोर से मैथिली नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद किया गया।लोगों ने प्रण लिया कि इस चुनाव में मैथिली मुद्दा को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों से वाजिब सवाल किए जाएं। मिथिला की संस्कार संस्कृति साहित्य और शिक्षा को षड्यंत्र के तहत समाप्त करने की जो कोशिश एनडीए सरकार द्वारा की गई उसका पुरजोर विरोध होना भी शुरू हो चुका है। विभिन्न दलों के प्रत्याशियों से सवाल तो पूछे ही जाएंगे अगर उन्होंने धोखे से भी अपने संबोधन में मैथिली भाषा का प्रयोग नहीं किया तो उनका बहिष्कार भी किया जाएगा। इसलिए इस हेतु साहित्याङ्गन,मिथिला फाउंडेशन दरभंगा,मैथिली लोक संस्कृति मंच लहेरियासराय,मिथिला सेना,अयाची नगर युवा संगठन आदि संगठनों ने आपस में मंत्रणा कर एक निर्णय किया की मिथिला का अपना घोषणा पत्र हो,राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में मैथिली का स्थान हो, मैथिली नहीं तो वोट नहीं का नारा मिथिला क्षेत्र में बुलंद रहे। कल की बैठक में प्रवासी मैथिलों से आग्रह किया गया कि आप अपने गांव अपने प्रभाव बाले लोगों सगे संबंधियों में फोन के माध्यम से मैथिली के अधिकार के लिए जन जागरूकता लाने और प्रत्याशियों से नेताओं से सवाल करने के लिए प्रेरित करें। ताकि विभिन्न इलाकों में मैथिली के अधिकार का आवाज सरकार के चौखट तक पहुंचे। उसे अपनी गलतियों का एहसास हो। कल की सभा मैथिली शिक्षा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित था। जिसकी अध्यक्षता राजदेव मंडल रमन ने की। उन्होंने साफ तौर पर कहा की मैथिली संवैधानिक भाषा है मिथिला के लोगों का यह मौलिक अधिकार है कि उसे प्राथमिक शिक्षा से मैथिली माध्यम से पढ़ाई हो। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति मातृभाषा के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा दिलाने हेतु आग्रह करती है। बावजूद इसके न जाने क्यों नीतीश की सरकार इस मामले में कान में तूर तेल लेकर सोई रही है। यह मुद्दा मिथिला के जन जन का मुद्दा है। हर एक जातियों का मुद्दा है। इस मुद्दे को इग्नोर नहीं जा किया जा सकता। सरकार को अधिकार देना ही होगा। दरभंगा से आए मैथिली आंदोलनी उदय शंकर मिश्रा ने कहा की मैथिली आंदोलन विगत 60- 70 वर्षों का आंदोलन है। समय-समय पर इस आंदोलन के बाद हम कदम दर कदम आगे बढ़ते रहें हैं।अब की लड़ाई मैथिली को राजनीतिक मुद्दा बनाने की लड़ाई है। राजनीतिक संरक्षण आवश्यक है ।इसके सिवा कोई दूसरा चारा नहीं है। मैथिली नहीं तो वोट नहीं के नारा के हाथ सत्ता को वोट का चोट देना ही पड़ेगा। अधिवक्ता अशोक सिंह ने बताया की प्राथमिक शिक्षा से मैथिली की पढ़ाई नहीं हुई तो फिर मैथिली की अस्मिता बचना कठिन है। सरकार हमें मैथिली दे इसके लिए प्रयास तेज करना होगा। प्रत्याशियों से सवाल करने होंगे ।उन्हें शपथ खिलाना होगा कि वह विधानसभा में मैथिली के अधिकार पर सवाल खड़ा करेंगे। मैथिली जमीन से उठाकर राजनीतिक मुद्दा बनाने वाले मैथिली आंदोलनी मलयनाथ मिश्रा ने कहा की मिथिला के बच्चों बच्चों तक इसके अधिकार का हनन नीतीश सरकार करती आ रही है।हम मैथिली के सहारे बीपीएससी यूपीएससी  प्रतियोगिता में सफल होकर बड़े से बड़े पद को पा सकते हैं। लेकिन मिथिला की प्रतिभा के साथ नीतीश कुमार ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में मैथिली को ना देकर और यहां के मैथिलों का वोट लेकर उससे छल किया है। यहां की युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। जानबूझकर यहां के बच्चों को एक बेहतरीन भविष्य मिलने से रोक रखा है। मैथिली नहीं तो वोट नहीं का मुद्दा इस बार राजनीति को प्रभावित करने के लिए सक्षम है।हम उस अधिकार को मिथिला के युवाओं के भविष्य के लिए लेकर रहेंगे। बैठक  में मैथिली फाउंडेशन के कौशल कुमार ने आगाह किया मिथिला के भीतर मैथिली का विरोध अब नहीं चलने वाला। सरकार संभल जाए मैथिली विरोधी भी संभल जाए। मैथिली मैथिली का नौटंकी करने वाले लोग भी संभल जाए। एक एक विरोधियों का प्रतिकार अब होने वाला है। बैठक में काशी नाथ झा किरण,कुशेश्वर पासवान,डॉ अनिल ठाकुर,विद्या चंद्र झा,अनुज कुमार,अमित कुमार ठाकुर, संतोष कुमार झा,मोतीलाल मंडल,मुकेश कुमार महतो,भागवत झा,राघवनाथ झा सहित कई अन्य उपस्थित थे।

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