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दरभंगा में गाँधी जयंती के अवसर पर “वर्तमान समय में खादी की प्रासंगिकता

दरभंगा में गाँधी जयंती के अवसर पर “वर्तमान समय में खादी की प्रासंगिकता

 


रिपोर्ट - राघव नाथ झा

आज दिनांक 03/10/2020 को खादी ग्रामोधोग भवन, रामबाग, दरभंगा में गाँधी जयंती के अवसर पर “वर्तमान समय में खादी की प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन एवं सभी खादी वस्त्रो पर 25 प्रतिशत विशेष छूट का शुभारंभ किया गया। जिसके मुख्य अतिथि प्रो० श्रीपति त्रिपाठी, कुलानुशासक, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविधालय, दरभंगा थे | 

 कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यअतिथि प्रो॰ श्रीपति त्रिपाठी,संस्था के सचिव श्री विनोद कुमार मिश्रा , शिक्षाविद डॉ समरेन्द्र कुमार सुधांशु ,श्री उपेंद्र झा के द्वारा गांधी जी के प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर किया गया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीपति त्रिपाठी ने अपना विचार व्यक्त करते हुये कहे कि खादी कपड़ा नहीं एक विचार और संस्कार है

 प्रो॰ श्रीपति त्रिपाठी आगे कहे कि आज के वर्तमान अर्थव्यवस्था और बाजार के हालात को देखते हुये खादी को अपना अस्तित्व बचाने कि बहुत बडी चुनौती है। हमें आज के युवा पीढी को खादी के महत्व के बारे में समझाना पडेगा कि खादी क्यो पह्ने। खादी सिर्फ एक वस्त्र मात्र नही है ये आज भी गाँवो में निवास करने वाले आम जन के जीने का आधार है। यह ग्रामीण अर्थ विकास का माध्यम है और गाँव के साधन से ही गाँव को सम्पन्न बनाती है।यह जन-जन के हाथ का हुनर है और उन्हे पर्मुखापेक्षी होने से बचाती है। उनहोने कहा कि खादी ही एकमात्र प्राकृतिक रुप से वातानुकूलित वस्त्र है जो आपके शरीर का प्रकृति के साथ सही संतुलन बनाए रखती है। उन्होने कहा कि खादी वस्त्र “शीत काले भवेत उष्णम.....ग्रृष्म काले भवेत शीतलम”।जिसका अर्थ होता है कि खादी वस्त्र शीतकालिन समय में गर्म रहता है और गरमी के मौसम में ठंडा रहता है यही खादी कि खासियत है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षाविद डॉ समरेन्द्र कुमार सुधांशु ने कहा कि खादी एक भावना है आम जन में उस भावना को जगाने का काम खादी ग्रामोधोग भवन, रामबाग, दरभंगा कर रहा है । डॉ सुधांशु ने आगे कहा कि बापू ने पुरे देश को खादी कि सौगात दी पर मिथिलांचल में खादी ग्रामोधोग भवन, रामबाग, दरभंगा आधुनिक समय में खादी को पह्चान दे रही है और आम जन तक पहुंचा रही है । उन्होने कहा कि अब ये हम सब कि जिम्मेदारी है कि खादी कि विरासत को अपने आने वाली पीढी के लिये बचा कर रखना है। इस अवसर पर पूर्व कोपरेटिव अफसर श्री उपेंद्र झा ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमलोगो ने खादी के महत्व को करीब से देखा है कि कैसे खादी आम जन के जीवन को जीने का आधार है। उन्होने कहा कि आज गली-गली में टेंट हाउस खुले हुये है पर पह्ले जब गाँव समाज में किसी के बेटी-बेटे कि शादी- विवाह होती थी तो खादी भंडार हर आम जन के लिये चौबिसो धंटे खुला रह्ता था और लोगो को निशुल्क चादर कम्बल उपयोग के लिये उपलब्ध करवाता था। लोग अपना काम कर के उन सामानो को वापस खादी भंडार को कर देते थे इस तरह से खादी भंडार लोगो के हरेक सुख दुख में हमेशा उपलब्ध रहता था। आज भी गाँवो में लोगो के जीवन में खादी भंडार का एक अलग महत्व है। लोग मंदिर कि तरह खादी भंडार को एक पुजनीये स्थल मानते है और आपको अगर कही सर्व धर्म का उदाहरण देखना है तो आप किसी खादी भंडार चले जाये वहाँ आपको सभी धर्मो के लोग एक साथ किस तह्जीब से रह्ते है वो दिख जायेगा।

    संगोष्ठी को इन लोगो के अलावा डॉ संतोष कुमार ,डॉ अमरनाथ शर्मा , श्री गोविंद मिश्र,श्री पंकज कुमार,श्री चन्दन कुमार ,श्री टुनटुन मण्डल ,मो॰ अब्दुल कलाम अंसारी ,श्रीमती रूबी देवी , बेबी मिश्रा। पुजा कुमारी भी विचार व्यक्त की । वही धन्यवाद अर्पण संस्था के सचिव श्री विनोद कुमार मिश्र ने किया ।

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