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धर्मायण का 101वाँ अंक, वैष्णव-उपासना अंक का लोकार्पण

धर्मायण का 101वाँ अंक, वैष्णव-उपासना अंक का लोकार्पण

 



आज दिनांक 30 नवम्बर, 2020 को महावीर मन्दिर की पत्रिका धर्मायण का 101 वाँ अंक अगहन, 2077 विक्रम संवत् यानी दिसम्बर, 2020 ई. के लिए ई-पत्रिका के रूप में प्रकाशित हुआ। इसके प्रधान सम्पादक आचार्य किशोर कुणाल हैं तथा सम्पादक पं. भवनाथ झा हैं। वर्तमान में कोविड-19 के कारण इस पत्रिका का केवल ई-संस्करण ही प्रकाशित किया जा रहा है। 

यह वैष्णव-उपासना अंक के रूप में विशेषांक है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् ने अग्रहायण मास को अपना स्वरूप माना है। कार्तिक मास में देवोत्थान एकादशी के बाद का यह पहला मास है। इसी मास में गीता-जयन्ती होती है तथा रामावतार में भगवान् विष्णु ने अपना विवाह भी इसी मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को किया था। इस प्रकार अगहन मास से वैष्णव-उपासना का गहरा सम्बन्ध है।

इस अंक में आचार्य किशोर कुणाल ने गीता के महत्त्व पर प्रकाश डाला है। डा. अरुण कुमार उपाध्याय का शोध आलेख “वैदिक विष्णु के स्वरूपों का विमर्श” वैदिक साहित्य में विष्णु के स्वरूप एवं उनके माहात्म्य पर प्रकाश डालता है। राजस्थान के विद्वान् लेखक डा. श्रीकृष्ण जुगनू ने देश के प्राचीनतम नारायण-वाटिका शिलालेख पर प्रकाश डाला है। साथ ही, वैष्णव-आगम की तीन शाखाओं पांचरात्र, वैखानस एवं भागवत के सिद्धान्तों और साहित्यों पर प्रकाश डाला गया है। बिहार में पायी गयी विष्णु-मूर्तियों के सिद्धान्त एवं स्वरूप पर डा. सुशान्त कुमार का गम्भीर आलेख भी प्रस्तुत किया है। इस अंक में सन्दर्भ-संकेत के साथ कुल 12 शोध आलेख हैं, जिनमें वैष्णव धर्म को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। यह अंक https://mahavirmandirpatna.org/dharmayan/dharmayan-vol-101-vaishnava-upasana-ank/ पर निःशुल्क पढा जा सकता है तथा इसे डाउनलोड कर वितरित भी किया जा सकता है।

(भवनाथ झा)

सम्पादक,

धर्मायण

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