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तीनों कृषि कानून  काला नहीं है तो डेढ़ साल के लिए रोकने की बात कृषि मंत्री ने कैसे की  -  एजाज़ अहमद ।

तीनों कृषि कानून काला नहीं है तो डेढ़ साल के लिए रोकने की बात कृषि मंत्री ने कैसे की - एजाज़ अहमद ।

 धन -दाताओं  की संरक्षक मोदी  सरकार अनर्गल प्रलाप बंद कर  बताए जब तीनों कृषि कानून  काला नहीं है तो डेढ़ साल के लिए रोकने की बात कृषि मंत्री ने कैसे की  -  एजाज़ अहमद ।


पटना 

 राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता एजाज़ अहमद ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तीनों कृषि कानून को काला मानने से ही इंकार कर रहे हैं ,जबकि उन्होंने किसान नेताओं के साथ बैठक  के बाद  ही इस बात की घोषणा  कर दी है कि डेढ़ साल तक इस कानून को अमल में नहीं लाया जाएगा । जब वह इस कानून को काला नहीं मानते हैं तो फिर अमल में आने से रोकने की बात  किस मुंह से कह रहे हैं ये इस बात से स्पष्ट होता है कि तीनों कानून काला ही नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है । और कहीं ना कहीं यह कानून कार्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों पर थोपने का प्रयास मात्र है । जब किसानो  ने 74 दिनों से सड़कों पर  धरना प्रदर्शन और आंदोलन करके इसे जन आंदोलन का रूप दे दिया है, तब भारत के कृषि मंत्री घबराहट में ऐसे कानून को काला बताने वाले विपक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी करना चाहते हैं।  लेकिन शायद  कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी को पता नहीं है की बिना विपक्ष  को विश्वास और साथ लिये इस तरह का कानून थोपे  जाने के कारण ही आज पूरा देश और किसान आंदोलन के कारण आंदोलित है, और इस कानून के खिलाफ पूरे देश में जन आंदोलन खड़ा हो गया है ।

 एजाज ने आगे कहा कि आज उसी का परिणाम है कि 3 घंटे का चक्का जाम  राष्ट्रव्यापी पूरी तरह से सफल रहा, और इसमें किसानों की बहुत बड़ी भागीदारी देखने को मिली । आज सड़कों पर किसान थे और विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को समर्थन दे कर यह बताने का काम किया है कि देश का विपक्षी दल अन्नदाताओं के साथ खड़ा है, क्योंकि सत्तापक्ष पक्ष एनडीए और भाजपा धन- दाताओं के फायदे के लिए तीनों कृषि कानून को थोप कर खेत, खलिहान ,मंडी और किसानों के अधिकार पर कारपोरेट घरानों का कब्जा दिलवाना चाहते हैं, जो किसी भी कीमत पर विपक्षी दल होने नहीं  देगा ।इन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल किसानों के अधिकार और हक की लड़ाई तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में सदन से लेकर सड़क तक लड़ने का कार्य करेगा और उनके अधिकार को दिलवाने के लिए और तीनों कृषि कानून को वापस लेने के लिए हर स्तर पर अपना आंदोलन और संघर्ष जारी रखेगा।

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