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सरकार विद्यालयों को सैकड़ों करोड़ निजी बकाया देती है तो लाखों शिक्षकों की भूख से जान बचेगी - शमायल अहमद।।

सरकार विद्यालयों को सैकड़ों करोड़ निजी बकाया देती है तो लाखों शिक्षकों की भूख से जान बचेगी - शमायल अहमद।।

 *पटना (बिहार) : सरकार विद्यालयों को सैकड़ों करोड़ निजी बकाया देती है तो लाखों शिक्षकों की भूख से जान बचेगी - शमायल अहमद* 



रिपोर्ट: धीरज कुमार झा


पटना : प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निजी विद्यालयों के करोड़ों रुपए सरकार के ऊपर बाकी है जो सत्र   2016-17, 2017-18, 2018-19, एवं 2019-20  में RTE के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की लंबित राशि निर्गत करने की मांग की और कहा कि इन पैसों से बिहार के पांच लाख से ज्यादा शिक्षको एवं उनके परिवारों की जान बच सकती है।शमायल अहमद ने मुख्यमंत्री से कहा कि  पिछले 16 माह से स्कूल की फीस नहीं आ रही है क्योंकि जनवरी-फरवरी 2020 मे राज्य के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालय कपकपी ठंड के कारण बंद थे और 2020 मार्च महीने से कोविड-19 के कारण अभी तक विद्यालय लगातार बंद है केवल बीच में 2 -3 माह विद्यालय खोलें गए इसके कारण स्कूलों को फीस नहीं आ रही है और अब लगता है कि आगे भी एक दो महीने आने की संभावना नहीं है। जिसके कारण बिहार के हजारों विद्यालय बंद हो चुके हैं और विद्यालय अपने यहां काम कर रहे 5 लाख से ज्यादा कर्मियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं। इसके कारण उनके परिवारों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए निजी विद्यालयों का पिछले 5 वर्षों से आरटीआई के अंतर्गत सैकड़ों करोड़ रुपए जो बाकी है सरकार के ऊपर अगर दे दी जाती है तो लोगों की जान बच सकती है।


शमायल अहमद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है के निजी विद्यालयों के बिजली बिल, वाहन टैक्स, बिल्डिंग टैक्स एवं वाहनों के ऋण की किश्त को माफ करने के आदेश जारी किए जाएं ताकि विद्यालय जो बंद हो चुके हैं और जो बाकी बंद होने के कगार पर हैं उन्हें राहत मिल जाए अन्यथा लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे एवं लाखों कर्मी बेरोजगार हो जाएंगे।


शमायल अहमद ने मुख्यमंत्री से सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े सभी निजी विद्यालयों की संबद्धता 3 सालों तक बढ़ाने के लिए भी मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अन्य सभी उद्योग धंधों के लिए बहुत सारे नियमों में ढील देते हुए विशेष आर्थिक सहायता भी जारी किया है उसी तरह शिक्षा क्षेत्र में भी राहत और विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 


शमायल अहमद ने कहा कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार के स्कूल संचालक, प्राचार्य, शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का बंद अवधि का प्रति व्यक्ति कम से कम 10000 की राशि प्रति माह की दर से भुगतान मानदेय के रूप में किया जाए‌ एवं 50 किलो अनाज परिवार को जिंदा रहने के लिए दिया जाए।

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