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रक्षा-कवच हमें अनेक जन्म-जन्मांतर के लिए हर प्रकार से सुरक्षित कर देता है:- सविता बहन।।

रक्षा-कवच हमें अनेक जन्म-जन्मांतर के लिए हर प्रकार से सुरक्षित कर देता है:- सविता बहन।।

 रक्षाबंधन पवित्र जीवन बनाने का यादगार पर्व है:- कृष्ण भाई



ब्यूरो रमेश शंकर झा,


समस्तीपुर:- जिले के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में अलौकिक रक्षाबंधन महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए कृष्ण भाई ने कहा कि रक्षाबंधन पवित्र जीवन बनाने का यादगार पर्व है। उन्होंने समाज के हर वर्ग के लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि आइये अबकी रक्षाबंधन पर नारी-सम्मान और उनकी अस्मिता की रक्षा का दृढ़ संकल्प लें और अपने चरित्रवान जीवन से इस पर्व की मर्यादा को दर्शाते हुए भारत की उच्च संस्कृति को फिर से बहाल करें। इस पावन अवसर पर सविता बहन ने भाई-बहन के पवित्र प्रेम का यादगार पर्व रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह महान पर्व हमें हमारे वास्तविक पवित्र आत्मिक स्वरूप की स्मृति दिलाता है। इस स्मृति के आधार से हमारे जीवन में विकारों रूपी अशुद्धि समाप्त होती जाती है और हमारा जीवन प्रेम, शान्ति, खुशी, आनंद और शक्तियों से भरपूर हो जाता है। स्वयं निराकार परमपिता परमात्मा शिव बाबा आकर हमें हमारे सत्य धर्म पवित्रता का कवच पहनाकर हमें सच्ची सुरक्षा का अनुभव कराते हैं। यह रक्षा-कवच हमें आने वाले अनेक जन्म-जन्मांतर के लिए हर प्रकार से सुरक्षित कर देता है। जहां हमें ना धन की चिंता होगी, ना परिवार की, ना स्वास्थ्य की, ना किसी प्रकार के यश या अपयश की। इसलिए कहा गया है- धर्मो रक्षति रक्षित: अर्थात् जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। आज समाज में व्याप्त कुरीतियों, झगड़े, उन्माद और हर प्रकार की अव्यवस्था का समाधान रक्षाबंधन के सच्चे अर्थ को जीवन में उतारने से संभव हो सकता है। अभी परमपिता परमात्मा स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर अपने मधुर महावाक्यों की मिठाई प्रतिदिन खिला रहे हैं। जिससे हमारे जीवन में मिठास आ जाती है। हमारा जीवन खुशियों से भरपूर हो जाता है और हम यह खुशियों की मिठाई सबको बांटने लगते हैं। वहीं सविता बहन ने सभी की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और मुख मीठा कराया। इस कार्यक्रम के मौके पर मुख्य रूप से रमेश चांदना, सतीश चांदना, ओम प्रकाश भाई, राजकुमार भाई, निर्दोष भाई, कृष्ण गोपाल दुआ, लाल बहादुर भाई सहित सैकड़ों भाई-बहन उपस्थित थे।

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