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सृजन घोटाले में नजदीकी पर सम्मन जारी होते ही जदयू राष्ट्रीय परिषद पीएम मेटेरियल के प्रस्ताव से नीतीश कुमार पलटे -एजाज़ अहमद ।।

सृजन घोटाले में नजदीकी पर सम्मन जारी होते ही जदयू राष्ट्रीय परिषद पीएम मेटेरियल के प्रस्ताव से नीतीश कुमार पलटे -एजाज़ अहमद ।।

सृजन घोटाले में नजदीकी पर सम्मन जारी होते ही जदयू राष्ट्रीय परिषद पीएम मेटेरियल के प्रस्ताव से नीतीश कुमार पलटे -एजाज़ अहमद ।।



    पटना       

 बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि भाजपा की नाराजगी को देखते हुए ही जदयू ने राष्ट्रीय परिषद के बैठक में लिए गए प्रस्ताव को भी राष्ट्रीय प्रधान महासचिव  ने अपने बयान से ही घबराहट में खारिज कर दिया है, ये इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार के द्वारा दो दिन पहले सृजन  घोटाले की फाइल में ऐसे लोगों को सम्मन जारी किया गया है जो बड़े नेताओ के करीबी हैं, और इस जांच की प्रक्रिया को धीरे धीरे आगे बढ़ाया जा रहा है,ताकि  लगाम बना रहे। सृजन मामले मे नजदीकी लोगों पर सम्मन  जारी होते ही भाजपा ने नीतीश कुमार को पलटी मारने पर मजबूर कर दिया। ये इस  बात का सबूत है कि जो अपने नीति और सिद्धांत और समाजवादी विचारधारा को भाजपा के पास गिरवी रख दिया हो, वह अपनी बातों पर अडिग रह ही नहीं सकता है, क्योंकि समाजवाद की विचारधारा पर चलने के लिए नीति और सिद्धांत पर अडिग होना आवश्यक है।  इनकी आदत में  है और सत्ता के स्वार्थ में कुछ भी करने के लिए ये तैयार हैं।

        एजाज ने आगे के बयान में कहा कि सुशासन के नाम पर डबल इंजन की सरकार लूट और भ्रष्टाचार में लिप्त है। और दोनों दल अपने-अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए और लूट, भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का रूप देने के लिए एक दूसरे के साथ गलबहिया कर चोर ,माफिया, अपराधी और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ  पूरी सरकार खड़ी  हैं। कभी करोड़ो  के निर्माण का बार-बार  उद्घाटन के घंटों के बाद टूट जाना तो कभी थानों से ही करोड़ों के शराब का गायब हो जाना, तो अब अरबो रुपये  के लाखो ट्रक बालू शासन -प्रशासन की मिलीभगत से गायब कर दिया गया है। जबकि बालू खनन के विरोध में कारवाई का हल्ला मचाने वाली सरकार का यह लूट का खेल ही सरकार को टिकाए हुए है। और दोनों दल  एक दूसरे को ना चाहते हुए भी मदद कर रहे हैं ,क्योंकि लूट में साझेदारी जो बनी हुई है।  

इन्होंने ने कहा कि ना तो भाजपा को अपने सिद्धांत से मतलब है और ना ही जदयू को अपने सिद्धांत से दोनों दलों की ओर से सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए  ही बेमतलब के मुद्दे को उछाला जा रहा है।

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