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कलयुग में शादी विवाह की वारन्टी गारेंटी लगभग समाप्त, इस परिस्थिति का आखिर जिम्मेदार कौन।।

कलयुग में शादी विवाह की वारन्टी गारेंटी लगभग समाप्त, इस परिस्थिति का आखिर जिम्मेदार कौन।।

 कलयुग में शादी विवाह की वारन्टी गारेंटी लगभग समाप्त, इस परिस्थिति का आखिर जिम्मेदार कौन।।



ज़ाहिद अनवर (राजु) / दरभंगा


*दरभंगा*--समाज में शादी विवाह को रिश्तों का पवित्र बंधन हमेशा से माना जाता रहा है लेकिन इन दिनों शादी तो बस एक केवल मजाक बनकर रह चुका है। इसकी वारन्टी गारेंटी कुछ भी नही की ये शादी कब तक टिकेगी? ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आज के समय के शादी और उसके बाद होने वाली घटनाओं को देख कर लिखना पर रहा है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जो राजधानी पटना के बिहटा थाना इलाके का है। जहां एक नई नवेली दुल्हन शादी के बाद पहली बार रक्षाबंधन पर अपने ननिहाल आई और अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। दरअसल मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहटा के गोकुलपुर निवासी जामोद शर्मा की बेटी सीमा कुमारी की शादी भोजपुर के बिरनपुर के संजीत कुमार के साथ इसी साल हुई थी। वही शुक्रवार की शाम वह अपनी मां सुनीता देवी के साथ बिहटा बाज़ार करने पहुंची थी। उसने माँ को बिठा दिया और प्रेमी संग फरार हो गई। अब भला उस पति का क्या दोष जिससे उसकी शादी कराई गई थी। एक घटना दरभंगा के डीहलाही से जुड़ा है जहाँ एक जुम्मन मियां (काल्पनिक नाम) के लड़के की शादी समस्तीपुर ज़िला में दिसंबर 2020 में हुई और वो रिश्ता अब टूटने के कगार पर है। टूटने की वजह सिर्फ इतना है कि लड़के की आमदनी मात्र 15000 रुपये महीने है और वो अपनी पत्नी के हर फरमाइश पूरी नही कर पा रहा है। अब एक बड़ा सवाल ये है की आखिर शादी के समय लड़की को उसके होने वाले पति की आमदनी क्यो नही बताई गई जिसके कारण रिश्ता टूटने तक पहुंच गया? आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा? तीसरी घटना सिमरी के गौरा गाँव से जुड़ा है जहाँ मो.अफ़ज़ल (काल्पनिक नाम) की शादी 19 जून 2021 को मधुबनी ज़िला में हुई और 3 अगस्त 2021 को लड़की वालों ने सामाजिक स्तर पर खुला (तलाक) ले लिया। मो.अफ़ज़ल सामाजिक बैठक मे ये बार बार कहता रहा कि वो खुला (तलाक) नही देना चाहता है फिर भी सामाजिक दबाव के कारण रिश्ता अलग हो गया। ऐसी ही घटना दोनों धर्मो में आये दिन देखने और सुनने को मिल रहा है। आखिर कलयुग में बिना टिकाव वाली शादियां होने का जिम्मेदार किसे माना जाए? ऐसी शादियां अगर होती रही तो सामाज को और आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश मिलेगा? समाज के शिक्षित वर्ग आखिर इन समस्याओं को दूर करने में पहल क्यो नही कर रहे है? क्या ऐसी शादियों से लड़के और उनके परिवार का सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल नही हो रहा है? ऐसे कई सवाल है जिनका जवाब इस समाज के उन तमाम शिक्षित वर्ग को देना चाहिए। आखिर वो अपनी ज़िम्मेदारी कब समझेंगे? क्या उन्हें शादी विवाह जैसे पवित्र रिश्तों के महत्व को समझाने के लिए आगे नही आना चाहिए? अगर इसी तरह खामोश बैठे रहे तो वो दिन दूर नही के इस पवित्र रिश्ते को मज़ाक बना कर रख देंगे! सुबह शादी होगी और शाम को रिश्ता अलग!

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