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शराबबंदी कानून आने के बाद पुलिस अपराध नियंत्रण करने में विफल : अभिजीत कुमार।।

शराबबंदी कानून आने के बाद पुलिस अपराध नियंत्रण करने में विफल : अभिजीत कुमार।।

 शराबबंदी कानून आने के बाद पुलिस अपराध नियंत्रण करने में विफल : अभिजीत कुमार।।



ज़ाहिद अनवर (राजु) / दरभंगा


*दरभंगा*--मानवाधिकार इमरजेंसी सोशल हेल्पलाइन के प्रदेश अध्यक्ष अभिजीत कुमार ने बिहार पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा की शराबबंदी कानून के बाद पुलिस अपने राह से भटक गई है। अब बड़े अपराध हत्या अपहरण बलात्कार जैसे घटनाओं में पुलिस सूचना मिलने के घंटो घंटो बाद तक नहीं पहुंचती। वही शराब की खेप की सूचना एवं शराब पीने की सूचना पर पुलिस बिना देर किए स्थल पर पहुंचकर अपना कुशल पुलिसिंग मीडिया और आम नागरिकों को दिखाती है। आगे प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि जब से बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुआ है तब से बिहार पुलिस अपराध नियंत्रण में विफल हो रही है क्योंकि राज्य सरकार का भी आदेश सख्ती से  से शराब बंदी लागू करने का है। जबकि अवैध शराब धंधेबाज एवं शराब का सेवन करने वालों पर वैधानिक कार्रवाई के लिए मध निषेध विभाग स्थापित है। उसके बावजूद बिहार पुलिस दिन रात शराब खोजने में लगी है। अखबार के माध्यम से आए दिन देखा जाता है कि शराब की खेप तो मिल जाती है लेकिन धंधेबाज माफिया का पता नहीं चलता जो संदेहास्पद है। अन्य अपराधिक मामलों में अपराधियों का सत्यापन हो जाता है। मध निषेध संशोधित कानून का फायदा भी भ्रष्ट पुलिस अच्छे से उठाती है। शराब पीने के मामले में जब किसी व्यक्ति की पुष्टि हो जाती है तो संशोधित कानून37(b) में  यह प्रावधान है कि शराब का सेवन के व्यक्ति को थाने से ही बेल देना है और पूरे बिहार में अधिकांश वैसे लोग को बेल मिल जाता है जो पुलिस के डिमांड को पूरा कर देते हैं जो डिमांड पूरा नहीं कर पाते उसे 37(c) के तहत जेल भेज दिया जाता है। इस धारा में शराब पीकर हल्ला हंगामा करना आता है लेकिन पुलिस द्वारा यह नहीं दर्शाया जाता है कि हल्ला हंगामा किसके साथ हुई किन किन व्यक्तियों के साथ समस्या उत्पन्न हुई पुलिस द्वारा कानून का धड़ल्ले से दुरुपयोग किया जा रहा है। वरीय पुलिस अधीक्षक अगर अपने स्तर से बिंदुवार जांच करे तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

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