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तलाक़ सहित कई मामलो में आई तेज़ी, कहाँ जा रहा मुस्लिम समाज?  डॉ. खुदादाद अब्दुल अली।।

तलाक़ सहित कई मामलो में आई तेज़ी, कहाँ जा रहा मुस्लिम समाज? डॉ. खुदादाद अब्दुल अली।।

 तलाक़ सहित कई मामलो में आई तेज़ी, कहाँ जा रहा मुस्लिम समाज?  डॉ. खुदादाद अब्दुल अली।।



ज़ाहिद अनवर (राजु) / दरभंगा


*दरभंगा*--एक दौर था जहाँ मुस्लिम समाज मे लड़कियों को शिक्षा देने में लोग पीछे रहते थे, पढ़ने पढ़ाने को लेकर मुस्लिम समुदाय में जागरूकता नही हुआ करता था लेकिन सरकार के लगातार पहल से या ये कहिए कि मुस्लिम परिवारों में शिक्षा के महत्व्व को जानने के बाद शिक्षा के प्रतिशत में काफी उछाल आया। साधन की उपलब्धता के कारण देश के कुछ ही क्षेत्र या गांव मुहल्ले ऐसे बचे होंगे जहाँ शिक्षा की अलख नही पहुँच पाई हो। लेकिन इसके साथ साथ एक नई बात देखने और सुनने को मिल रहा है वो ये की मुस्लिम समाज मे तलाक़ और इससे संबंधित मामलों में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। तलाक के बढ़ते मामलों को देखकर मुस्लिम समाज का पढ़ा लिखा तबका बिल्कुल खामोश है जो चिंता का विषय है। एक निजी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार दरभंगा ज़िला में एक महीने में तलाक के लगभग कम से 25 से 30 मामले लगातार सामने आ रहे है। अगर इसे सही मान लिया जाए तो ये काफी चौंकाने वाली स्थिति बनती जा रही है। अगर वर्तमान स्थिति की तुलना आज से 30 से 40 साल पहले की स्थिति से किया जाए तो उस ज़माने में शिक्षा का प्रतिशत कम था तो तलाक़ के मामले भी कम थे लेकिन वर्तमान परिवेश में शिक्षा के प्रतिशत में बढ़ोतरी के साथ साथ तलाक़ के मामले में भी बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है, आखिर क्यों? मतलाब ये के लोग अपने बच्चों को पढ़ा लिखा तो रहे है लेकिन ये कैसी पढ़ाई है जो ज़िंदगी को आसान बनाने के बजाए बोझ बनता जा रहा है। हमारे समाज के ज़िम्मेदार लोग अगर अब नही सोचेंगे तो कब सोचेंगे? बिलासपुर निवासी कांग्रेस के वरीय नेता डॉ. खुदादाद अब्दुल अली ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए हिन्द टीवी 24 को बताया कि जो ज़िन्दा कौम हुआ करती थी, अपनी समस्याओं का निदान खुद आपस मे बैठकर कर लिया करती थी अब सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए है जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नही है। उन्होंने बताया कि मेरे एक साला की पत्नी का निधन कुछ महीनों पूर्व हो गया है। वो अपने पीछे चार बच्चों को छोड़कर दुनिया को अलविदा कह दी। अब हमारे साले के शादी के लिए रिश्ता ढूंडा जा रहा है, अब तक उन्हें 20 घरों से शादी के लिए प्रस्ताव आया लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि सभी रिश्ते तलाकशुदा लड़कियों के थे। एक भी विधवा (बेवा) का रिश्ता नही आया। कुछ परिवार तो ऐसे है जिस घर मे बीटेक, एमटेक और बीएड किये हुए लोग है। मतलाब कि जहाँ दुनियावी तालीम की डिग्री भरी पड़ी है वहाँ तलाक के मामले ज़्यादा है, आखिर इसकी कुछ तो वजह होगी ये हमे ज़रूरी सोचना चाहिए। एक दर्द भरी बात ये है कि अगर हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अब भी नही सोचेंगे तो कब सोचेंगे? कुछ सामाजिक चिंतकों की बात सही माने तो उनका कहना कि तलाक़ के ज़्यादा मामलात दीनी इल्म से अपने बच्चों को दूर रखने की वजह से है। जिस तरह अपने बच्चों को दुनियावी इल्म दी जा रही है इसके साथ साथ मुकम्मल दीनी इल्म भी दिया जाए तो मामलात कम हो सकते है। बहरहाल ये कहने में कोई हर्ज नही है कि तमाम मसाएल अगर वक़्त रहते हुए हल नही किए गए तो आने वाली पीढ़ी को बर्बाद होने से कोई नही रोक सकता है और आने वाली हमारी नस्ल उन तमाम ज़िम्मेदार लोगो से चीख चीख कर पूछेगी की उस वक़्त तुम कहाँ थे जब हम बर्बाद हो रहे थे और शायद हमारे पास जवाब देने के लिए कोई अल्फ़ाज़ ही न बचे हो!

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